JAUNPUR

जौनपुर: कचगांव नगर पंचायत में बगावत, चेयरमैन पर भ्रष्टाचार के आरोप

जौनपुर: कचगांव नगर पंचायत में ‘बगावत’; सभासदों ने चेयरमैन और अफसरों पर लगाए भ्रष्टाचार व तानाशाही के गंभीर आरोप”

जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : सुनील कुमार की रिपोर्ट 

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले स्थित कचगांव नगर पंचायत में भारी प्रशासनिक और सियासी घमासान मच गया है।

यहां के निर्वाचित सभासदों (पार्षदों) ने चेयरमैन और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

सभासदों ने जिला प्रशासन को एक 16 सूत्रीय शिकायत पत्र सौंपकर नगर पंचायत में चल रहे तानाशाही रवैये, अमानवीय व्यवहार और व्यापक वित्तीय अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

सभासदों का साफ आरोप है कि नगर पंचायत में ‘बोर्ड’ को पूरी तरह से दरकिनार कर मनमाने ढंग से सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है।

सभासदों के प्रमुख आरोप: ‘सवाल पूछो तो RTI लगाने को कहते हैं’

जिला प्रशासन को सौंपे गए पत्र में सभासदों ने चेयरमैन और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:

  • सम्मान और संवाद की कमी: सभासदों का आरोप है कि उन्हें जन प्रतिनिधि होने के बावजूद कोई मान-सम्मान नहीं दिया जाता।

  • जनहित के मुद्दों पर बात करने पर अधिकारी और कर्मचारी उनके साथ तानाशाही और असहयोगपूर्ण व्यवहार करते हैं।

  • बोर्ड बैठकों की अनदेखी: नगर पंचायत में नियमित रूप से बोर्ड बैठकें आयोजित नहीं की जातीं और सभासदों के प्रस्तावों को कूड़ेदान में डाल दिया जाता है। कार्यवाही पुस्तिका में आपत्तियां तक दर्ज नहीं की जातीं।

  • RTI का बहाना: किसी भी विकास कार्य या योजना की जानकारी मांगने पर अधिकारियों द्वारा सीधे कह दिया जाता है कि “जानकारी चाहिए तो RTI (सूचना का अधिकार) लगाओ।”

बिना बोर्ड मंजूरी के टेंडर और वित्तीय हेराफेरी

शिकायत में सबसे गंभीर आरोप वित्तीय अनियमितताओं को लेकर लगाए गए हैं:

  • टेंडर में ‘खेल’: बिना बोर्ड की स्वीकृति के टेंडर पास किए जा रहे हैं और करोड़ों के कार्यों का भुगतान भी किया जा रहा है।

  • 18 दिसंबर 2025 को बोर्ड बैठक भंग होने के बाद किस आधार पर टेंडर जारी हुए, इसका कोई जवाब नहीं है। वहीं, 25 मार्च 2026 को भी बिना बोर्ड चर्चा के गुपचुप टेंडर जारी कर दिए गए।

  • सफाईकर्मियों के नाम पर गोलमाल: नगर पंचायत में आउटसोर्सिंग पर कितने सफाईकर्मी तैनात हैं, इसका कोई आंकड़ा सभासदों को नहीं दिया जाता, जिससे बड़े स्तर पर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है।

  • आय-व्यय का कोई हिसाब नहीं: विकास कार्य सभी वार्डों में समान रूप से न कराकर चहेतों के वार्ड में कराए जा रहे हैं और आय-व्यय का विवरण कभी बोर्ड के सामने प्रस्तुत नहीं किया जाता।

UP नगर पालिका अधिनियम 1916 का खुला उल्लंघन

सभासदों ने चेयरमैन पर ‘उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916’ के नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाया है।

उनके अनुसार, चेयरमैन दो बोर्ड बैठकों के बीच तय सीमा से अधिक धनराशि अपनी मनमर्जी से खर्च कर रहे हैं।

इसके अलावा, सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब सभासद मुख्यमंत्री के ‘आई.जी.आर.एस.’ (IGRS – एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) पोर्टल पर इन घोटालों की शिकायत करते हैं,

तो नगर पंचायत के अधिकारी खुद ही मामले में भ्रामक और फर्जी रिपोर्ट लगाकर शिकायतों का निस्तारण कर देते हैं। प्रशासन से अब इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

Santosh SETH

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