जौनपुर/मुफ्तीगंज – विधिक साक्षरता/जागरूकता शिविर का हुआ आयोजन

“विधिक सेवा दिवस के अवसर पर व श्रीमती वाणी रंजन अग्रवाल माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के निर्देशन में ‘‘विधान से समाधान’’ विषय पर श्री प्रशांत कुमार सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय/सचिव पूर्णकालिक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर की देख-रेख में शनिवार 05 अक्टूबर 2024 को ‘‘विकास खण्ड मुफ्तीगंज, जौनपुर’’ में महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता प्रदान कराने हेतु विधिक साक्षरता/जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया”

जौनपुर 06 / 10 / 2024 मंगेश प्रजापति की रिपोर्ट 

शिविर को सम्बोधित करते हुए श्री प्रशान्त कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय/ सचिव पूर्णकालिक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर द्वारा बताया गया कि यौन उत्पीड़न को अनुचित यौन व्यवहार के रूप में परिभाषित किया गया है जो अपमानजनक, शर्मनाक या धमकी भरा है।

कार्यस्थल में यौन उत्पीड़न दुनिया भर में एक व्यापक समस्या है चाहे एक विकसित, विकासशील या अविकसित देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध दुनिया भर में स्थानिक है। यह एक वैश्विक मुद्दा है जो पुरूषों और महिलाओं दोनों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

खासकर महिलाओं में यह आम होता जा रहा है। यही कारण है कि उन्हें कन्या भू्रण हत्या, मानव तस्करी, पीछा करना, यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और उनमें से सबसे भयानक अपराध, बलात्कार जैसे अत्याचारों का शिकार होना पड़ता है। इन प्रकरणों से सम्बन्धित महिलाओं को प्राप्त अधिकार व प्राप्त संरक्षण के संबंध में उनको अवगत कराया गया।

जिला प्रोबेशन अधिकारी, जौनपुर विजय कुमार पाण्डेय द्वारा बताया गया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत एक महिला के मौलिक अधिकारों का हनन और उसके जीवन के अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीने और किसी भी पेशे को निभाने का अधिकार है किसी भी व्यवसाय, व्यापार पर जिसमें यौन उत्पीड़न से मुक्त सुरक्षित वातावरण का अधिकार शामिल है।

इसी प्रकार श्रम प्रर्वतन अधिकारी द्वारा कारखाना एक्ट व अन्य श्रम कानूनों के तहत प्राप्त संरक्षण और अधिकतम कार्यावधि की अवधि, मातृत्व अवकाश उपलब्ध होने की व्यवस्था व कार्य स्थल पर शिशुओं को संरक्षित रखने की व्यवस्था व बच्चों को फिडींग करने का अधिकार आदि से अवगत कराया गया।

साथ में कार्यस्थल पर यदि उनके साथ किसी प्रकार का यौन उत्पीड़न या अन्य किसी प्रकार का उत्पीड़न किया जाता है तो उनके संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रदत्त विधि व्यवस्थाओं के द्वारा उनको क्या संरक्षण व अधिकार प्रदान किये गये है उनसे अवगत कराकर श्रम से संबंधित विधियों से अवगत कराया गया।

पैनल लॉयर देवेन्द्र कुमार यादव द्वारा बताया गया कि कारखाना अधिनियम 1948 के अंतर्गत 14 वर्ष से कम के किसी भी बालक को काम पर नहीं लगाया जा सकता। 14 वर्ष से अधिक आयु के बालक अर्थात 15 से 18 तक के किसी भी किशोर को तब तक काम पर नहीं लगाया जा सकता, जब तक डॉक्टर द्वारा प्रमाणित स्वास्थ्य प्रमाण पत्र नहीं मिल जाता।

कुछ खतरनाक व्यवसायों में बालकों और महिलाओं को लगाना मना है। कारखाना अधिनियम में मजदूरी सहित वार्षिक अवकाश की सुविधा का भी वर्णन किया गया है।

साथ ही उ0 प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की समस्त योजनाओं के संबंध में विस्तार पूर्वक बताया।

इस अवसर पर खण्ड विकास अधिकारी, असमिता सेन, डा0 दिलीप कुमार सिंह, डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल, अस्टिंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल, प्रकाश तिवारी, अनुराग चौधरी, 60 महिला तथा पी0एल0वी0 गण श्री रविन्द्र कुमार, सुनील कुमार, शिवशंकर सिंह व अन्य ग्रामीण नागरिक उपस्थित रहें।