जौनपुर जिले में अब पारंपरिक फीता या जरीब की जगह सैटेलाइट आधारित 'जीएनएसएस रोवर' से भूमि की सटीक पैमाइश की जाएगी। इससे जमीन के सीमांकन में होने वाली त्रुटियां खत्म होंगी और विवादों का तेजी से निस्तारण होगा।
जौनपुर में जमीन की पैमाइश अब हुई हाई-टेक: सैटेलाइट आधारित ‘GNSS रोवर’ से नपेगी भूमि, अधिकतम 3 सेमी की होगी गुंजाइश; DM ने की वकीलों से यह खास अपील”
जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : अब्दुल हई राजा की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में भूमि विवादों को सुलझाने और जमीन की नपाई (पैमाइश) को पूरी तरह से त्रुटिरहित बनाने के लिए प्रशासन ने एक बड़ी और आधुनिक पहल की है।
जिले में अब पारंपरिक फीता या जरीब (Measuring Tape) की जगह जीएनएसएस (Global Navigation Satellite System – GNSS) रोवर का इस्तेमाल किया जाएगा।
बुधवार (01 जुलाई, 2026) को जिलाधिकारी श्री सैमुअल पॉल एन. की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में इस नई तकनीक के इस्तेमाल और भूमि सीमांकन को लेकर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
जिलाधिकारी ने बताया कि उ०प्र० राजस्व संहिता की धारा-24 के अंतर्गत सटीक एवं त्रुटिरहित पैमाइश के लिए माननीय राजस्व परिषद द्वारा जनपद की प्रत्येक तहसील को 1-1 रोवर और अन्य उपकरण उपलब्ध करा दिए गए हैं।
प्रशिक्षित टीम करेगी पैमाइश: जीएनएसएस रोवर के सुचारू संचालन के लिए पहले ही प्रत्येक तहसील के तहसीलदार, नायब तहसीलदार, 1 राजस्व निरीक्षक और 3 लेखपालों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। तहसीलों में गठित यही प्रशिक्षित टीम अब फील्ड में इस हाई-टेक रोवर का प्रयोग करेगी।
कार्यशाला के दौरान मुख्य राजस्व अधिकारी अजय अम्बष्ठ ने बताया कि पूर्व में प्रचलित विधि (फीता अथवा जरीब) से पैमाइश में अक्सर यह समस्या आती थी कि भूमि के ऊबड़-खाबड़ (ऊपर-नीचे) होने पर दूरी का आकलन गलत हो जाता था।
सैटेलाइट निर्देशांक: जीएनएसएस रोवर सीधे सैटेलाइट द्वारा प्राप्त निर्देशांक (Coordinates) के माध्यम से काम करता है।
सटीक आकलन: इससे एक विशेष बिंदु से अन्य बिंदुओं के मध्य दूरी एवं कोण का सटीक विश्लेषण वैज्ञानिक पद्धति से संभव होगा।
केवल 3 सेमी का विचलन: इस हाई-टेक रोवर के इस्तेमाल से दो बिंदुओं के मध्य अधिकतम +3 सेमी का ही विचलन (Variance) संभव है, जिससे पैमाइश पूरी तरह से विश्वसनीय और त्रुटिरहित हो जाएगी।
डिजिटल रिकॉर्ड: इस रोवर से प्राप्त आंकड़ों को डिजिटाइज्ड रूप से सुरक्षित रखा जा सकता है, ताकि भविष्य में कभी भी इसका पुनः अवलोकन किया जा सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जीएनएसएस रोवर से प्राप्त आंकड़े केवल तकनीकी सहायता के लिए हैं।
भूमि का अंतिम सीमांकन और फैसला राजस्व अभिलेखों, स्वीकृत नक्शों और विधिक प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा।
यदि इसके उपयोग में कोई तकनीकी या विधिक असंगति आती है, तो राज्य सरकार को प्रक्रिया में संशोधन का पूर्ण अधिकार होगा।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे फील्ड में जाने से पहले इस रोवर की पूरी जानकारी हासिल कर लें।
साथ ही, उन्होंने कलेक्ट्रेट बार के अध्यक्ष और सभी सम्मानित अधिवक्तागणों (वकीलों) से विशेष अपील की है कि वे इस नई और पारदर्शी तकनीक के प्रयोग में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें, ताकि आम जनता के भूमि विवादों को तेजी से और निष्पक्ष तरीके से निपटाया जा सके।
इस अहम कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) परमानन्द, उप जिलाधिकारीगण, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, लेखपालगण और भारी संख्या में सम्मानित अधिवक्ता उपस्थित रहे।
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