जौनपुर : फर्जी जन्म प्रमाण पत्र गिरोह का भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार

“जौनपुर पुलिस ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पाँच सदस्यों को गिरफ्तार किया है”

जौनपुर 05 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

आरोपियों के कब्जे से 9 एंड्रॉइड मोबाइल फोन और 4 लैपटॉप बरामद किए गए हैं। यह गिरोह भोले-भाले लोगों से मोटी रकम वसूलकर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था और इसके लिए विभिन्न राज्यों के ग्राम पंचायत अधिकारियों की लॉगिन आईडी और पासवर्ड का अवैध उपयोग किया जाता था।

पहली कार्रवाई: दो आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने सबसे पहले अंकित यादव उर्फ शुभम यादव (23 वर्ष, मऊ) और राजकुमार उर्फ विक्की (22 वर्ष, गौतमबुद्ध नगर) को नहोरा सई नदी के पास से शाम 7:10 बजे गिरफ्तार किया। दोनों के पास से 3 एंड्रॉइड फोन और 3 लैपटॉप मिले।

दूसरी कार्रवाई: तीन और आरोपी पकड़े गए

इसके बाद उपनिरीक्षक अनिल कुमार तिवारी और उपनिरीक्षक विजय कुमार सिंह की टीम ने राशिद (26 वर्ष, बिहार), राजीव कुमार (24 वर्ष, अमरोहा) और अभिषेक गुप्ता (31 वर्ष, लखनऊ) को बाकराबाद हाईवे तिराहा से सुबह 5:00 बजे गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 6 एंड्रॉइड मोबाइल और 1 लैपटॉप जब्त किया गया।

अधिकारियों की लॉगिन आईडी का दुरुपयोग

एसपी सिटी आयुष श्रीवास्तव ने बताया कि गिरोह उत्तराखंड, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कुछ ग्राम पंचायत अधिकारियों की जीमेल आईडी और लॉगिन क्रेडेंशियल का उपयोग कर असली जैसा दिखने वाला जन्म प्रमाण पत्र तैयार करता था।

गिरोह पहले आवश्यक जानकारी — नाम, माता-पिता का नाम, पता और जन्मतिथि— प्राप्त करता और फिर सरकारी वेबसाइट पर लॉगिन कर प्रमाण पत्र बनाता था।

जांच में सामने आया कि गिरोह व्हाट्सऐप और फेसबुक ग्रुपों के जरिए ग्राहक बनाता था। एक दिन के लिए लॉगिन आईडी-पासवर्ड 20,000 रुपये में बेचे जाते थे, जबकि तैयार प्रमाण पत्र 600–700 रुपये में उपलब्ध कराया जाता था।

डेढ़ साल से चल रहा था रैकेट

पुलिस के अनुसार यह रैकेट करीब डेढ़ साल से सक्रिय था और हजारों फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा चुके हैं। पुलिस ने 500 से अधिक प्रमाण पत्र बरामद किए हैं।

जिन अधिकारियों की लॉगिन से ये प्रमाण पत्र जारी हुए, उन्हें दस्तावेज निरस्त करने के लिए पत्र भेजा जाएगा। एक मामले में पाया गया कि व्यक्ति का पता पश्चिम बंगाल का है, जबकि प्रमाण पत्र महाराष्ट्र से जारी किया गया।

आधार और अन्य दस्तावेजों तक आसान पहुँच

एसपी सिटी के अनुसार फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर लोग आसानी से आधार कार्ड, पासपोर्ट, और अन्य सरकारी दस्तावेज भी बना लेते थे, जिससे सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था।

ऐसे हुआ गिरोह का खुलासा

रतन कुमार (जौनपुर) ने अपनी बेटी का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए विजय यादव को दिया। सीएमओ कार्यालय द्वारा प्रमाण पत्र का सत्यापन कराने पर वह फर्जी पाया गया। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और गिरोह के अन्य सदस्यों — जिनमें रामभरत मौर्या (चंदौली) भी शामिल है— का नाम सामने आया।

पुलिस ने बढ़ाई जाँच की रफ्तार

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे ग्राम पंचायत की आईडी से मिलते-जुलते पासवर्ड बनाकर लॉगिन करते थे और AnyDesk पर स्क्रीन शेयरिंग के माध्यम से पासवर्ड रीसेट कर लेते थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और जल्द ही अन्य नामों के खुलासे की संभावना जताई जा रही है।

जौनपुर पुलिस ने मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

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