जौनपुर : बेलांव हत्याकांड में पूर्व सांसद धनंजय सिंह समेत चारों आरोपी बरी
” बहुचर्चित बेलांव हत्याकांड को लेकर गुरुवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। पूर्व सांसद धनंजय सिंह समेत चारों आरोपी बरी किए गए”
जौनपुर 04 / 07 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
जौनपुर जिले के केराकत के बेलांव में हुए संजय निषाद व नंदलाल निषाद हत्याकांड में बृहस्पतिवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। इस मामले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह समेत कुल चारों आरोपी बरी हो गए हैं।
अपर सत्र न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट में पूर्व में चारों आरोपियों का बयान दर्ज हो गया था। बयान में सभी ने खुद को निर्दोष बताया था। पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने उन्हें राजनीतिक विद्वेषवश फंसाये जाने की बात कही थी।
बता दें कि एक अप्रैल 2010 को 5.15 बजे सुबह बेलांव घाट बैरियर के पास टोल टैक्स के विवाद में संजय निषाद व नंदलाल निषाद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि ठेकेदारी की रंजिश को लेकर हत्याकांड को अंजाम दिया गया।
पुलिस ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह के साथ ही आशुतोष सिंह, पुनीत सिंह व सुनीत सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिला किया। कोर्ट में गवाहों के बयान भी दर्ज हुए हैं। एडीजीसी लाल बहादुर पाल ने 20 गवाहों को परीक्षित कराया।
कमजोर पैरवी पर कोर्ट ने की टिप्पणी
अभियोजन की कमजोर पैरवी पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अब तक की सुनवाई में न तो मजबूत गवाह और न ही पर्याप्त साक्ष्य दाखिल किए गए। इसके पीछे बहुत बड़ा कारण कोर्ट के समक्ष वादी मृतक संजय के भाई राजेंद्र व संजय की पत्नी पुष्पा का भी बयान से मुकर जाना है।
15 साल तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने गुरुवार को चारों आरोपियों के पक्ष में 23 पन्ने का फैसला सुनाते हुए उन्हें 10 मिनट में बरी कर दिया। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि केराकत के बेलांव पुल पर टोल का ठेका मृतक संजय के पिता के नाम था। पिता अभयराज द्वारा स्पष्ट साक्ष्य ठेकेदारी के विवाद के संबंध में न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किए गए।
इसके अलावा आरोपियों का कोई विवाद ठेकेदारी के संबंध में संजय या उसके पिता अभयराज से था, इसका भी प्रमाण अभियोजन नहीं दे पाया। घटना के प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी कोर्ट में पेश नहीं किए गए। अभियोजन अपनी बात को साबित करने में भी असफल रहा।
वादी ने जो मुकदमा दर्ज कराया था, उसमें चारों आरोपियों में किसी का नाम नहीं था। न ही विवेचना के दौरान आरोपियों का नाम शामिल करने के बाद उनकी शिनाख्त कराई गई, इससे भी अभियोजन आधारविहीन हो जाता है।
फैसले की खबर सुनते ही मृतक संजय निषाद के पिता राजेंद्र प्रसाद कोर्ट परिसर में तेजी से रोने लगे
फैसले की खबर सुनते ही मृतक संजय निषाद के पिता राजेंद्र प्रसाद कोर्ट परिसर में तेजी से रोने लगे। उन्होंने कहा कि भले ही हमें यहां की अदालत से न्याय नहीं मिला, लेकिन भगवान की अदालत से जरूर न्याय मिलेगा। ईश्वर के घर देर है पर अंधेर नहीं।
मृतक संजय निषाद 6 भाइयों में सबसे छोटे और तेज-तर्रार थे। 29 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने कई ठेकेदारी के काम संभाल लिए थे, जिससे कुछ लोगों की उनसे रंजिश हो गई। उनकी हत्या के बाद ठेके के सभी काम बंद हो गए। अधिकारियों के दबाव में परिजनों ने 25 लाख रुपये घर से खर्च कर ठेके का काम चलाया, जिससे परिवार की आर्थिक हालत बेहद खराब हो गई।
घटना के छह साल बाद संजय के पिता अभयराज की मौत ने परिवार को और तोड़ दिया। फैसले से मृतकों के परिजन बेहद आहत हैं। संजय के भाई राजेंद्र प्रसाद समेत पूरा परिवार घर में रोता बिलखता रहा और इंसाफ की उम्मीद भगवान के दरबार से जताई।
वहीं मृतक नंदलाल का परिवार भी फैसले से टूट गया। उनका बेटा रोज़ी-रोटी के लिए प्रदेश से बाहर मजदूरी करने को मजबूर है।











