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ईरान-इस्राइल जंग: PM मोदी की UAE राष्ट्रपति से बात, होर्मुज सुरक्षा पर जोर

ईरान-इस्राइल जंग के बीच PM मोदी ने UAE राष्ट्रपति से की फोन पर बात: होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर बनी सहमति, पश्चिम एशिया में शांति बहाली पर जोर

नई दिल्ली/दुबई: द  पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

पश्चिम एशिया (West Asia) में ईरान और इस्राइल के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर लंबी बातचीत की है।

हालांकि इस बातचीत की शुरुआत आगामी ईद की शुभकामनाओं से हुई, लेकिन जल्द ही यह क्षेत्रीय सुरक्षा और तनाव जैसे गंभीर मुद्दों पर आ गई।

28 फरवरी के बाद से क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ा है और अमेरिका-इस्राइल के हमलों के जवाब में ईरान ने यूएई सहित कई खाड़ी देशों को निशाना बनाया है।

यूएई पर हमलों की कड़ी निंदा, नौवहन सुरक्षा पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई पर हुए हालिया ड्रोन और मिसाइल हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बेगुनाह लोगों की जान जाना और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

बातचीत के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट कर जानकारी दी कि दोनों नेता ‘स्टेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) के माध्यम से जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के महत्व पर सहमत हुए हैं।

यह समुद्री रास्ता दुनिया की तेल आपूर्ति का केंद्र है और यहां किसी भी रुकावट का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

रणनीतिक साझेदार के रूप में भारत का रुख साफ

यह बातचीत खाड़ी क्षेत्र में बढ़े हुए तनाव की गंभीरता को रेखांकित करती है। सूत्रों के अनुसार, यूएई ने अब तक 1500 से ज्यादा ईरानी ड्रोन इंटरसेप्ट किए हैं।

दुबई में धमाकों की आवाजें सुनाई देना और एयर स्पेस का अस्थायी रूप से बंद होना खतरे की भयावहता को दिखाता है।

ऐसे माहौल में भारत सिर्फ स्थिति पर नजर नहीं रख रहा, बल्कि अपने प्रमुख रणनीतिक साझेदारों के साथ लगातार संवाद में है।

पीएम मोदी ने मौजूदा संघर्ष के बीच सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान, जॉर्डन, इस्राइल और ईरान के नेताओं से भी बात की है।

सुरक्षा और स्थिरता पर मजबूत रिश्ते

इस बातचीत से यह भी साफ हो गया कि भारत और यूएई के रिश्ते सिर्फ आर्थिक या औपचारिक नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा और स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी अत्यंत मजबूत हैं।

दोनों नेताओं ने तय किया कि वे पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द शांति, सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।

Santosh SETH

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