ईरान संकट: घबराए तेहरान ने भारत को किया फोन, विदेश मंत्रालय का ‘Red Alert’ – तुरंत देश छोड़ें भारतीय!
“अमेरिका के संभावित हमले और देश के भीतर जारी खूनी गृहयुद्ध के बीच ईरान ने भारत की ओर उम्मीद की नजरों से देखा है। बढ़ते दबाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची (Seyed Abbas Araghchi) ने भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से फोन पर आपात बातचीत की”
नई दिल्ली 15 / 01 / 2026 संतोष सेठ की रिपोर्ट
इस बातचीत के तुरंत बाद, भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने खतरे को भांपते हुए ईरान में मौजूद अपने नागरिकों के लिए ‘तत्काल निकासी’ (Leave Immediately) की एडवाइजरी जारी कर दी है।
जयशंकर-अराघची वार्ता: क्या है संकेत?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस बातचीत की पुष्टि की है। उन्होंने लिखा:
“ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया। हमने ईरान और उसके आसपास की बदलती स्थिति पर चर्चा की।”
Received a call from Iranian Foreign Minister Seyed Abbas Araghchi. @araghchi
We discussed the evolving situation in and around Iran.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) January 14, 2026
हालाँकि, बातचीत का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि तेहरान, जो इस समय अमेरिका और अपनी ही जनता के दोहरे दबाव में है।
भारत जैसे तटस्थ (Neutral) और प्रभावशाली देश के साथ संपर्क साधकर कूटनीतिक रास्ता तलाश रहा है। भारत के अमेरिका और ईरान दोनों से अच्छे संबंध हैं, इसलिए यह कॉल बेहद अहम मानी जा रही है।
10 दिन में दूसरी एडवाइजरी: ‘तुरंत निकलें भारतीय’
ईरान के हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा भारतीय विदेश मंत्रालय की सक्रियता से लगाया जा सकता है।
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5 जनवरी 2026: पहली एडवाइजरी जारी की गई थी, जिसमें “उपलब्ध साधनों से लौटने” की अपील थी।
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ताजा एडवाइजरी: इसमें भाषा सख्त और अत्यावश्यक है। मंत्रालय ने साफ कहा है कि हालात विस्फोटक हैं, इसलिए भारतीय नागरिक ‘तुरंत’ (Immediately) ईरान छोड़ दें।
ईरान में क्या हो रहा है?
ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है:
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गृहयुद्ध जैसे हालात: खामेनेई सरकार के खिलाफ जनता सड़कों पर है। विद्रोह को कुचलने के लिए सेना ने ताकत का इस्तेमाल किया है।
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मौत का आंकड़ा: रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
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विदेशी साजिश का आरोप: ईरानी सरकार का कहना है कि इन दंगों के पीछे ‘विदेशी ताकतों’ का हाथ है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे सरकारी दमन का नतीजा बता रहे हैं।











