डिजिटल सामान्य फसल अनुमान सर्वेक्षण के फायदे और विस्तार की जानकारी
सरकार ने बताए डिजिटल सामान्य फसल अनुमान सर्वेक्षण (DGCES) के फायदे, देश के 23 राज्यों में हो रहा है संचालित”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में भारत सरकार तेजी से काम कर रही है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में ‘डिजिटल सामान्य फसल अनुमान सर्वेक्षण’ (DGCES) के कार्यान्वयन और इसके फायदों की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने डॉ. थोल तिरूमावलवन द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया कि इस डिजिटल प्रणाली को देश भर में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।
23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हो रहा है विस्तार
कृषि राज्य मंत्री ने बताया कि DGCES की शुरुआत खरीफ 2023-24 के सीजन में 10 राज्यों के चयनित जिलों में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी।
इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, रबी सीजन 2023-24 में इसे 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ाया गया।
वर्तमान में यह प्रणाली 23 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सफलतापूर्वक काम कर रही है। इस चरणबद्ध विस्तार ने देश में फसल अनुमान के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत किया है।
पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस है यह प्रणाली
फसल कटाई प्रयोगों (CCE) के लिए DGCES के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं। यह पूरी तरह से एक डिजिटल और कागज रहित (पेपरलेस) प्रणाली है।
मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए खेतों से ही रीयल-टाइम डेटा इकट्ठा किया जाता है। पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए इस सिस्टम में जियो-टैगिंग (स्थान की पहचान), टाइम-स्टैम्पिंग और प्रमाणित फोटो खींचने की सुविधा शामिल है।
सटीक और पारदर्शी उपज अनुमान
इस डिजिटल प्रणाली के कारण राज्यों में डेटा जुटाने की प्रक्रिया मानकीकृत हो गई है। इससे फसल की उपज का अनुमान अधिक सटीक, विश्वसनीय और समयबद्ध हुआ है।
अधिकारियों के लिए एक वेब-आधारित डैशबोर्ड भी बनाया गया है, जिससे फसल उपज के अनुमानों की ऑनलाइन निगरानी और पर्यवेक्षण करना आसान हो गया है।
इस योजना के पूर्ण कार्यान्वयन की लक्ष्य तिथि पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसका विस्तार राज्य सरकारों की तैयारियों, उनके डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और फील्ड अधिकारियों के प्रशिक्षण के आधार पर आपसी परामर्श से लगातार किया जा रहा है।











