भारत ने पाकिस्तान की धमकियों का कड़ा जवाब देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इस्लामाबाद सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक 'सिंधु जल संधि' रुकी रहेगी।
पाकिस्तान की धमकियों पर भारत का कड़ा प्रहार: ‘आतंकवाद बंद होने तक रुकी रहेगी सिंधु जल संधि (IWT)’; तीस्ता परियोजना पर भी दिया जवाब”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत और पाकिस्तान के बीच ‘सिंधु जल संधि’ (Indus Water Treaty – IWT) को लेकर तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है।
पाकिस्तान द्वारा अपने हिस्से का पानी रोके जाने के खिलाफ दी गई खुली धमकियों और गीदड़भभकियों को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है।
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को दोटूक लहजे में स्पष्ट कर दिया कि सिंधु जल संधि पर भारत के रुख में रत्ती भर भी बदलाव नहीं आया है।
भारत ने अपनी पुरानी सख्त शर्त दोहराते हुए कहा है कि जब तक इस्लामाबाद सीमा-पार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism) को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक यह संधि पूरी तरह से रुकी रहेगी।
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सरकार का रुख स्पष्ट किया।
जायसवाल ने कहा, “सिंधु जल संधि पर भारत का रुख एक जैसा रहा है। पाकिस्तान द्वारा सीमा-पार आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने के कारण IWT को रोक दिया गया है।”
भारत ने जोर देकर कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद करने के लिए ‘ठोस और कभी न पलटे जा सकने वाले कदम’ (Concrete and Irreversible Steps) नहीं उठाता, तब तक संधि निलंबित ही रहेगी।
भारतीय विदेश मंत्रालय की यह कड़ी टिप्पणी पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्री मुसादिक मलिक के उस भड़काऊ बयान के जवाब में आई है,
जिसमें उन्होंने धमकी दी थी कि इस्लामाबाद उन हाथों को “काट देगा” जो संधि के तहत पाकिस्तान के पानी के हिस्से पर दावा करने की कोशिश करेंगे।
इसके बाद पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भी बौखलाहट में कहा कि 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ यह समझौता कानूनी रूप से बाध्यकारी है और इसे एकतरफा तरीके से निलंबित या संशोधित नहीं किया जा सकता है।
नौ साल की लंबी बातचीत के बाद 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा-पार नदी प्रणाली के बंटवारे के लिए इस संधि पर हस्ताक्षर हुए थे।
पहलगाम आतंकी हमला: 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले के बाद, भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े दंडात्मक कदम उठाने की घोषणा की थी।
इन्हीं दंडात्मक कदमों के तहत 1960 की ऐतिहासिक सिंधु जल संधि को रोकने का बड़ा फैसला लिया गया था, जिसका मुख्य कारण पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को लगातार समर्थन देना था।
इसी ब्रीफिंग के दौरान तीस्ता नदी परियोजना से जुड़े एक सवाल पर भी विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश को भारत की विकास सहायता ‘आपसी सहमति वाले रोडमैप’ पर आधारित है, जिसकी नियमित रूप से समीक्षा की जाती है।
उन्होंने बताया कि भारत ने तीस्ता नदी परियोजना पर अपना पक्ष बांग्लादेश को पहले ही स्पष्ट कर दिया है।
इस मुद्दे पर कोई भी समग्र दृष्टिकोण तय करते समय सभी संबंधित पहलुओं पर बारीकी से विचार किया जाएगा।
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