ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' से हटा इंडोनेशिया, 1 अरब डॉलर देने से साफ इनकार
दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया ने डोनाल्ड ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल का स्थायी सदस्य बनने से इनकार कर दिया है। $1 बिलियन की भारी-भरकम फीस और देश में बढ़ते विरोध के बीच राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने स्पष्ट किया कि इंडोनेशिया केवल शांति सेना भेजेगा, न कि सदस्यता शुल्क देगा।
ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को इंडोनेशिया की बड़ी ‘ना’! $1 बिलियन देने से साफ़ इनकार, राष्ट्रपति प्रबोवो का बड़ा बयान
संतोष सेठ (‘The Politics Again’) | जकार्ता/वाशिंगटन
दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला इस्लामिक देश इंडोनेशिया, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) पहल का स्थायी सदस्य बनने से पीछे हट गया है।
इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर इंडोनेशिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को देश के भीतर कड़ी आलोचना और बढ़ते विरोध का सामना करना पड़ रहा था।
बढ़ते घरेलू राजनीतिक दबाव के बीच, राष्ट्रपति सुबियांतो ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है।
अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर जारी बयान में उन्होंने दृढ़ता से कहा कि इंडोनेशिया इस पहल की स्थायी सदस्यता के लिए मांगी जा रही 1 अरब डॉलर (लगभग 8300 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम राशि का भुगतान नहीं करेगा।
राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि इंडोनेशिया ने इस पहल के तहत केवल अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापना के लिए अपने सैनिक भेजने की प्रतिबद्धता जताई थी, न कि स्थायी सदस्य बनने के लिए इतनी बड़ी रकम देने की।
बजट और सरकारी बयानों को लेकर मचा था घमासान
इससे पहले फरवरी की शुरुआत में इंडोनेशियाई सरकार के बड़े अधिकारियों के विरोधाभासी बयानों ने देश में काफी भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी।
3 फरवरी को वित्त मंत्री पुरबय युधि सदेवा ने सुझाव दिया था कि गाजा की मदद के लिए आवश्यक पैसा रक्षा मंत्रालय के बजट से निकाला जा सकता है।
उसी दिन विदेश मंत्री सुगियोनो ने कहा कि यह पैसा देना अनिवार्य (जरूरी) नहीं है, हालांकि उन्होंने उस वक्त साफ मना भी नहीं किया था।
इन बयानों के बाद मचे राजनीतिक बवाल को शांत करते हुए राष्ट्रपति प्रबोवो ने अब स्पष्ट कर दिया है कि गाजा के पुनर्निर्माण के लिए इंडोनेशिया जो भी मदद देगा, वह उसकी अपनी मर्जी से होगी।
यह मदद सीधे मानवीय संस्थाओं के जरिए भेजी जाएगी और इसका ट्रंप के ‘Board of Peace’ की सदस्यता या उसकी शर्तों से कोई लेना-देना नहीं होगा।
वाशिंगटन की बैठक में एक भी पैसा देने का वादा नहीं
गौरतलब है कि बीते 19 फरवरी को वाशिंगटन, डीसी में ‘Board of Peace’ की पहली बड़ी बैठक आयोजित की गई थी।
इस बैठक में अमेरिका और मध्य-पूर्व (खाड़ी) के देशों ने मिलकर गाजा पुनर्निर्माण के लिए कुल $17 बिलियन (लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये) देने का वादा किया था।
इतनी बड़ी रकम के वादों के बावजूद इंडोनेशिया अपने स्टैंड पर कायम रहा। टेम्पो (Tempo) की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति प्रबोवो ने इस बैठक के बाद कहा, “बाकी सभी देशों ने कुछ न कुछ योगदान दिया है, कुछ ने तो बहुत बड़ी रकम दी है।
लेकिन इंडोनेशिया उनमें शामिल नहीं था। जब मुझसे पूछा गया, तो मैंने कोई भी फंड देने का वादा नहीं किया।”
इंडोनेशिया का यह कड़ा रुख यह स्पष्ट करता है कि वह अंतरराष्ट्रीय बैठकों में शामिल होकर कूटनीतिक रिश्ते तो बनाए रख रहा है, लेकिन किसी भी बाहरी दबाव में आकर पैसा देने को तैयार नहीं है।
राष्ट्रपति का साफ कहना है कि वे अपनी मर्जी और सही समय पर ही गाजा की मदद करेंगे।
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