Map and railway route area near Doklam and West Bengal where the new strategic railway line is approved.

चीन सीमा के पास भारत का सामरिक दांव, नई रेलवे लाइन मंजूर

चीन की सीमा पर भारत का बड़ा सामरिक दांव: उत्तर बंगाल में 272 करोड़ की लागत से बनेगी नई रेलवे लाइन”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत ने चीन से सटी अपनी सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक पर सामरिक बढ़त हासिल करने की दिशा में एक और बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है।

केंद्र सरकार ने उत्तर बंगाल में खुनिया मोड़ (चालसा) से जलढाका तक 17 किलोमीटर लंबी नई रेलवे लाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी है, जिस पर लगभग 272 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

पहली नजर में यह परियोजना डुआर्स क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय संपर्क बढ़ाने जैसी लग सकती है, लेकिन इसके पीछे चीन और भूटान सीमा के पास भारत की गहरी रणनीतिक तैयारियां छिपी हैं।

डोकलाम विवाद के करीब होगी पहुंच

रेल मंत्रालय से स्वीकृत यह परियोजना चालसा के निकट खुनिया मोड़ से शुरू होकर जलपाईगुड़ी और कालिम्पोंग के वन क्षेत्रों से गुजरते हुए जलढाका तक पहुंचेगी।

  • मानसून के बाद रेलवे और पश्चिम बंगाल वन विभाग इस परियोजना का संयुक्त सर्वेक्षण शुरू करेंगे।

  • जलढाका नदी का महत्व रणनीतिक रूप से बेहद अहम है, क्योंकि यह सिक्किम के कुपुप (बितांग) झील से निकलती है, जो जेलेप ला दर्रे और डोकलाम त्रि-जंक्शन के बेहद करीब स्थित है।

  • वर्ष 2017 में इसी डोकलाम क्षेत्र में भारत और चीन की सेनाएं 73 दिनों तक आमने-सामने थीं। उसके बाद से चीन लगातार सीमा के उस पार सैन्य बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है।

  • ऐसे में यह रेलवे लाइन भारत के लिए सीमा पर तेजी से सैनिकों और हथियारों की आवाजाही सुनिश्चित करेगी।

दीर्घकालिक रणनीतिक तैयारी का हिस्सा

भारतीय रेलवे पहले से ही चालसा से सीमावर्ती क्षेत्रों की ओर लगभग 200 किलोमीटर लंबी एक रणनीतिक रेलवे लाइन की संभावनाओं पर काम कर रहा है, और यह 17 किमी की लाइन उसी का पहला चरण है।

इसके अलावा, इस परियोजना को सिक्किम में निर्माणाधीन शिवोक-रंगपो रेलवे लाइन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

सरकार भविष्य में इसे नाथू ला दर्रे तक विस्तारित करने की योजना बना रही है, जिससे पूर्वी हिमालयी सीमाओं पर भारत को एक दूसरा मजबूत सामरिक रेल कॉरिडोर मिल जाएगा।