भारत के नए हाईवे प्रोजेक्ट से चीन की घेराबंदी
भारत का ‘साइलेंट मास्टरस्ट्रोक’: 1300 KM लंबे हाईवे से ड्रैगन को मात, नेपाल-भूटान के लिए खुला नया रास्ता
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
दक्षिण एशिया की भू-राजनीति (Geopolitics) में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चीन के महत्वाकांक्षी CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) को करारा जवाब देते हुए, भारत ने एक ऐसा ‘साइलेंट मास्टरस्ट्रोक’ चला है जिसने बीजिंग की नींद उड़ा दी है।
‘The Politics Again’ की सामरिक डेस्क की रिपोर्ट के अनुसार, भारत एक 1300 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड इकोनॉमिक कॉरिडोर (हाईवे) का निर्माण कर रहा है, जो चीन के दबदबे को खत्म कर नेपाल, भूटान और बांग्लादेश को हमेशा के लिए दिल्ली के करीब ले आएगा।
चिकन नेक का बोझ कम, नॉर्थ-ईस्ट के लिए ‘गेम चेंजर’
दशकों से भारत का पूर्वोत्तर (North East) क्षेत्र कनेक्टिविटी की समस्या से जूझ रहा था और ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ (चिकन नेक) पर भारी दबाव था।
लेकिन यह नया 1300 किलोमीटर लंबा हाईवे सीधे तौर पर कोलकाता पोर्ट से शुरू होकर सिलीगुड़ी होते हुए नेपाल और भूटान की सीमाओं तक जाएगा।
रफ्तार और बचत: जो ट्रक पहले पहाड़ी रास्तों पर हफ्तों फंसे रहते थे, वे अब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बॉर्डर तक पहुंचेंगे।
लागत में कमी: इससे ट्रांसपोर्टेशन की लागत में 30% तक की भारी कमी आएगी।
लैंड लिंक्ड: यह प्रोजेक्ट भारत के नॉर्थ-ईस्ट को ‘लैंड लॉक’ से ‘लैंड लिंक्ड’ (Land-linked) बना देगा।
नेपाल और भूटान को मिला ‘समंदर’, चीन का जाल फेल
नेपाल और भूटान जैसे देशों की सबसे बड़ी मजबूरी यह है कि वे ‘लैंडलॉक’ हैं (इनके पास अपना समुद्र नहीं है)।
चीन हमेशा से इन्हें तिब्बत के बेहद दुर्गम और महंगे रास्तों का लालच देकर अपने कर्ज के जाल में फंसाने की कोशिश करता रहा है।
भारत के इस नए हाईवे ने इन दोनों देशों को एक ऐसा बेहतरीन विकल्प दे दिया है, जिसे ठुकराना उनके लिए नामुमकिन है।
अब नेपाल और भूटान के व्यापारियों के लिए कोलकाता और हल्दिया पोर्ट (बंदरगाह) तक पहुंचना बेहद आसान और सस्ता हो जाएगा। जब भारत के रास्ते व्यापार सस्ता होगा, तो ये देश चीन के महंगे रास्तों की तरफ नहीं देखेंगे।
BBIN और भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी की जीत
इस भू-रणनीतिक कहानी का एक और अहम हिस्सा बांग्लादेश है। इस पूरे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट को BBIN (बांग्लादेश, भूटान, इंडिया, नेपाल) इनिशिएटिव के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसमें बांग्लादेश एक प्रमुख भागीदार है।
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत ने बिना किसी शोर-शराबे के ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (Neighbourhood First) पॉलिसी के तहत चीन की घेराबंदी कर दी है।
यह दक्षिण एशिया में भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक और आर्थिक जीत मानी जा रही है।
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