ईरान के डूबे युद्धपोत का रहस्य जानता है भारत, अमेरिका-ईरान विवाद में फंसी नई दिल्ली | The Politics Again
“विनाशकारी युद्ध के बीच फंसा भारत: ईरान के डूबे युद्धपोत का ‘रहस्य’ सिर्फ नई दिल्ली को पता, अमेरिका-ईरान के बीच फंसी कूटनीति “
नई दिल्ली (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट
मिडिल ईस्ट (Middle East) में भड़की युद्ध की आग अब केवल ईरान, इजराइल और अमेरिका तक सीमित नहीं रह गई है। इस महायुद्ध की तपिश अब सीधे नई दिल्ली तक पहुंच चुकी है।
ईरान के नए और कट्टरपंथी माने जाने वाले सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) की ताजपोशी के बाद एक ऐसा अभूतपूर्व विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें भारत न चाहते हुए भी केंद्र बिंदु बन गया है।
विवाद के केंद्र में समुद्र में डूबा ईरान का एक युद्धपोत है, और इस जहाज की असली सच्चाई का ‘रहस्य’ शायद पूरी दुनिया में सिर्फ भारत (India) के पास है।
अमेरिका और ईरान के दावे: डूबे युद्धपोत का सच क्या है?
हाल ही में समुद्र में अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा सैन्य टकराव हुआ, जिसमें अमेरिका ने ईरान के एक प्रमुख युद्धपोत को डुबो दिया।
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अमेरिका का दावा: पेंटागन का कहना है कि यह ईरानी युद्धपोत पूरी तरह से सीआरसी (Combat Ready Configuration – CRC) मोड में था, यानी यह युद्ध और हमले के लिए पूरी तरह तैयार था। इसलिए इसे निशाना बनाना एक वैध सैन्य कार्रवाई थी।
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ईरान का दावा: इसके ठीक उलट, तेहरान का दावा है कि उसका युद्धपोत पूरी तरह से ‘निहत्था’ था, उसमें कोई मिसाइल या हथियार मौजूद नहीं था और अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय युद्ध नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए उसे डुबोया है।
भारत के पास कैसे है यह ‘रहस्य’? (मिलन नेवल एक्सरसाइज)
इस अंतरराष्ट्रीय विवाद में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब यह तथ्य सामने आया कि जिस ईरानी युद्धपोत को अमेरिका ने डुबाया है, वह कुछ ही समय पहले भारतीय नौसेना (Indian Navy) के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘मिलन’ (MILAN Naval Exercise) में शामिल हुआ था।
इस सैन्य अभ्यास में युद्धपोतों की तकनीकी स्थिति और क्षमताओं का गहरा मूल्यांकन होता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत को सटीक जानकारी हो सकती है कि वह ईरानी जहाज वास्तव में हथियारों से लैस था या निहत्था!
अब ईरान भारत से यह उम्मीद कर रहा है कि नई दिल्ली खुले तौर पर दुनिया को यह सच्चाई बताए कि उसका युद्धपोत निहत्था था।
भारत के सामने सबसे बड़ा कूटनीतिक ‘धर्मसंकट’
ईरान की यह मांग भारत के लिए एक बहुत बड़ा कूटनीतिक सिरदर्द बन गई है। नई दिल्ली के सामने एक तरफ रणनीतिक साझेदार अमेरिका है, तो दूसरी तरफ पारंपरिक दोस्त ईरान।
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चाबहार पोर्ट (Chabahar Port): भारत ने पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच बनाने के लिए ईरान में चाबहार बंदरगाह विकसित किया है। यदि ईरान नाराज होता है, तो भारत के इस ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ पर ग्रहण लग सकता है।
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INSTC कॉरिडोर: भारत और ईरान के बीच ‘इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC) विकसित किया जा रहा है, जो भारत को सीधे रूस और यूरोप के बाजारों से जोड़ता है। इस विवाद में किसी एक पक्ष का चुनाव करने से यह अहम व्यापारिक रूट खतरे में पड़ सकता है।
मोजतबा खामेनेई का कट्टर रुख बढ़ाएगा मुश्किलें
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अपने दिवंगत पिता अली खामेनेई की तुलना में कहीं अधिक सख्त और कट्टर रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं।
संकट की इस घड़ी में वह अपने सहयोगी देशों (जिसमें भारत भी शामिल है) से स्पष्ट समर्थन की उम्मीद करेंगे।
भारत की विदेश नीति हमेशा से अमेरिका, रूस, इजराइल और ईरान के बीच एक बेहतरीन ‘संतुलन’ (Balancing Act) बनाए रखने की रही है।
लेकिन इस बार, जब एक डूबे हुए युद्धपोत का रहस्य सीधे भारत की नौसेना के पास मौजूद है, तो यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि नई दिल्ली इस भू-राजनीतिक चक्रव्यूह से कैसे बाहर निकलती है।












