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पराली प्रबंधन पर शिवराज और भूपेंद्र यादव की हुई अहम बैठक

🌾 पराली संकट का स्थायी समाधान! शिवराज सिंह चौहान और भूपेंद्र यादव ने की उच्च स्तरीय बैठक, ‘धान की कटाई’ से पहले सरकार अलर्ट “

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

उत्तर भारत में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही ‘पराली जलाने’ (Stubble Burning) और उससे होने वाले गंभीर वायु प्रदूषण की समस्या हर साल सामने आती है।

लेकिन इस बार केंद्र सरकार धान की कटाई का मौसम शुरू होने से पहले ही पूरी तरह अलर्ट मोड (Alert Mode) में आ गई है।

पराली प्रबंधन के स्थायी समाधान को लेकर मंगलवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में एक बड़ी और उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित की गई।

‘The Politics Again’ की इस रिपोर्ट में आइए जानते हैं इस अहम बैठक के मुख्य बिंदु:

🤝 कृषि और पर्यावरण मंत्रालय आए एक साथ

पराली जलाने की समस्या केवल कृषि से नहीं, बल्कि सीधे तौर पर पर्यावरण से भी जुड़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस उच्च स्तरीय बैठक की संयुक्त रूप से अध्यक्षता दो दिग्गज केंद्रीय मंत्रियों ने की:

  1. श्री शिवराज सिंह चौहान (केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री)

  2. श्री भूपेंद्र यादव (केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री)

दोनों मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में इस बात पर जोर दिया गया कि किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए केवल नियम ही काफी नहीं हैं, बल्कि उन्हें इसके निस्तारण का एक सुलभ और स्थायी समाधान (Sustainable Solution) भी देना होगा।

🚜 ‘फसल अवशेष प्रबंधन’ (CRM) योजना की हुई समीक्षा

बैठक के दौरान केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘फसल अवशेष प्रबंधन’ (Crop Residue Management – CRM) योजना की गहन समीक्षा की गई।

  • प्रगति रिपोर्ट: अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत अब तक किसानों को पराली के निपटान के लिए क्या-क्या मशीनरी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई गई है।

  • राज्यों की तैयारियां: आगामी कुछ महीनों में धान की फसल पककर तैयार हो जाएगी और कटाई का मौसम (Harvesting Season) शुरू होगा।

  • इसे देखते हुए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे प्रमुख राज्यों की तैयारियों की भी समीक्षा की गई।

💡 क्या है सरकार का मुख्य उद्देश्य?

बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि इस साल धान की पराली का प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन हो सके। सरकार का प्रयास है कि पराली को जलाने के बजाय:

  • बायो-गैस (Bio-gas) और इथेनॉल (Ethanol) बनाने में इसका इस्तेमाल हो।

  • पराली को जैविक खाद में बदला जाए।

  • उद्योगों में इसे ईधन के विकल्प के रूप में प्रयोग किया जाए, जिससे किसानों को पराली से भी अतिरिक्त आमदनी हो सके।

इस पूर्व-नियोजित बैठक से यह साफ हो गया है कि मोदी सरकार इस बार सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत को दमघोंटू धुएं से बचाने के लिए समय रहते ठोस कदम उठा रही है।

नोट: केंद्र सरकार की अहम बैठकों, कृषि नीतियों, पर्यावरण से जुड़े फैसलों और राष्ट्रीय स्तर की हर महत्वपूर्ण खबर के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।

Santosh SETH

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