“उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को प्रयागराज में आयोजित जगतगुरु रामानंदाचार्य के 726वें जन्मदिवस समारोह के मंच से जाति और समुदाय के नाम पर विभाजन की राजनीति करने वालों पर तीखा प्रहार किया”
विशेष ब्यूरो, प्रयागराज | 11 जनवरी, 2026
‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, सीएम योगी ने बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए हिंदुओं की एकजुटता का आह्वान किया और विपक्षी दलों की ‘चुप्पी’ पर तंज कसा।
मुख्यमंत्री ने समाज को चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग जाति, धर्म और समुदाय के आधार पर हिंदू समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं, वे देश को विनाश की ओर ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा:
“जाति, धर्म और समुदाय के आधार पर विभाजन हमें उसी तरह नष्ट कर देगा जैसा हम बांग्लादेश में देख रहे हैं। वहां हिंदू हिंसा का सामना कर रहे हैं, लेकिन यहां के तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी खामोश हैं।”
विपक्षी दलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर निशाना साधते हुए योगी आदित्यनाथ ने उपहास उड़ाया। उन्होंने कहा कि जो लोग भारत में छोटी घटनाओं पर शोर मचाते हैं, वे पड़ोसी देश में हो रहे भीषण अत्याचारों पर मौन हैं।
फेविकोल और टेप का तंज: मुख्यमंत्री ने व्यंग्य करते हुए कहा, “ऐसा लगता है जैसे उनके मुंह में फेविकोल भर दिया गया हो या किसी ने टेप लगा दिया हो। बांग्लादेश के मुद्दे पर उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा।”
700 वर्ष पहले की सामाजिक एकता का स्मरण करते हुए सीएम योगी ने कहा कि जगतगुरु रामानंदाचार्य ने उस समय ‘जात-पांत पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई’ का मंत्र दिया था। उन्होंने विभिन्न जातियों के शिष्यों को साथ लेकर समाज को एकजुट किया था, जिसकी आज सबसे अधिक आवश्यकता है।
भाषण के दौरान पेश किए गए आंकड़े दिल दहला देने वाले हैं। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार, अकेले दिसंबर 2025 में हिंसा की 51 बड़ी घटनाएं दर्ज की गईं:
10 हत्याएं और लूटपाट की कई घटनाएं।
23 मामले घरों, मंदिरों और जमीनों पर अवैध कब्जे और आगजनी के।
झूठे आरोप: हिंदुओं को ‘RAW का एजेंट’ बताकर गिरफ्तारी और यातना देने के 4 मामले।
बलात्कार के प्रयास और शारीरिक हमलों की निरंतर घटनाएं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संबोधन स्पष्ट संकेत है कि आगामी चुनावों और राष्ट्रीय विमर्श में ‘हिंदू एकता’ और ‘पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की स्थिति’ मुख्य मुद्दे रहने वाले हैं। ‘फेविकोल’ वाला बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जो विपक्ष की घेराबंदी करने का एक नया राजनीतिक टूल बन सकता है।
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