हावड़ा स्टेशन का कायाकल्प: लंबे प्लेटफॉर्म, अत्याधुनिक लाउंज और मेट्रो
हावड़ा स्टेशन का महा-कायाकल्प: 22-कोच की ट्रेनों के लिए लंबे हुए प्लेटफॉर्म, अंडरवाटर मेट्रो और वंदे भारत शेड से बदली तस्वीर”
हावड़ा/कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
1854 में स्थापित देश का सबसे पुराना और व्यस्ततम हावड़ा रेलवे स्टेशन (Howrah Station) अब सिर्फ अतीत की विरासत नहीं रहा, बल्कि यह भविष्य की आधुनिक, सुरक्षित और यात्री-केंद्रित यात्रा का प्रतीक बन चुका है।
पिछले एक दशक में हुए व्यापक विकास कार्यों ने पूर्व भारत की इस धड़कन को पूरी तरह से एक नए और हाईटेक रूप में ढाल दिया है।
हर दिन लाखों यात्रियों की आवाजाही वाले इस स्टेशन पर प्लेटफॉर्म के विस्तार से लेकर अंडरवाटर मेट्रो और वर्ल्ड-क्लास लाउंज तक, कई बड़े बदलाव किए गए हैं।
प्लेटफॉर्म विस्तार से लंबी ट्रेनों का सफर हुआ आसान यात्रियों की सुविधाओं को केंद्र में रखते हुए पूर्व रेलवे (Eastern Railway) ने प्लेटफॉर्मों का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है, ताकि 22 से 24 कोच वाली लंबी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें आसानी से आ-जा सकें:
प्लेटफॉर्म नंबर 15: इसे 312 मीटर से बढ़ाकर अब 591 मीटर कर दिया गया है।
प्लेटफॉर्म नंबर 14: इसे 581 मीटर तक विस्तारित किया गया है।
प्लेटफॉर्म नंबर 24: 3 करोड़ रुपये की लागत से इसे 635 मीटर लंबा किया गया है।
भविष्य की योजना: पूर्व रेलवे के अनुसार, प्लेटफॉर्म नंबर 10, 11, 12 और 13 को भी क्रमशः 542, 591 और 547 मीटर तक बढ़ाने की योजना है।
जल्द ही प्लेटफॉर्म 1, 8, 10 से 15 तक को 22-कोच वाली आधुनिक LHB ट्रेनों के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा।
ईस्ट-वेस्ट मेट्रो और ‘वंदे भारत’ का आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
हावड़ा स्टेशन की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने में ‘ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर’ (East-West Metro Corridor) का बड़ा योगदान है।
हुगली नदी के नीचे से गुजरने वाली यह मेट्रो (लागत: 8,574.98 करोड़ रुपये) हावड़ा मैदान को साल्ट लेक से जोड़ रही है।
2025 से चालू होने के बाद इसने शहर के ट्रैफिक दबाव को काफी कम कर दिया है। इसके अलावा, हाईटेक ‘वंदे भारत’ (Vande Bharat) ट्रेनों के रखरखाव के लिए 25 करोड़ रुपये की लागत से एक समर्पित मेंटेनेंस शेड भी तैयार किया गया है।
यात्रियों के आराम के लिए वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं
स्टेशन पर केवल ट्रेनों के संचालन पर ही नहीं, बल्कि यात्रियों के आराम का भी पूरा ध्यान रखा गया है।
पुराने और नए कॉम्प्लेक्स में दो अत्याधुनिक ‘एग्जीक्यूटिव लाउंज’ बनाए गए हैं।
बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और भारी सामान वाले यात्रियों की सुविधा के लिए अपर क्लास वेटिंग हॉल में 3 करोड़ रुपये की लागत से दो नए लिफ्ट लगाए गए हैं।
“हम उस अंतिम यात्री के बारे में सोचते हैं…”
हावड़ा स्टेशन के इस कायाकल्प पर पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) शिबराम माझी ने कहा,
“जब हम किसी प्लेटफॉर्म का विस्तार करते हैं या नया लाउंज बनाते हैं, तो हम उस अंतिम यात्री के बारे में सोचते हैं। वह बेटी, वह मरीज, या वह मजदूर। हावड़ा में हो रहा हर काम यही बताता है कि हम परवाह करते हैं।”
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