"PM Narendra Modi shaking hands with Antonio Costa and Ursula von der Leyen after signing India-EU FTA deal"

भारत और EU के बीच ऐतिहासिक ‘ट्रेड डील; PM मोदी बोले- “27 तारीख को 27 देशों के साथ यह संयोग अद्भुत है”

“भारत की कूटनीतिक यात्रा में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा”

नई दिल्ली “THE POLITICS AGAIN” संतोष सेठ की रिपोर्ट 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने संयुक्त रूप से भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत संपन्न होने की घोषणा की।

यह भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता है, जो 1.45 अरब भारतीयों और यूरोपीय संघ के 27 देशों के बीच एक नया आर्थिक पुल बनाएगा।

“लोकतंत्र की दो महाशक्तियां एक साथ”

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इसे एक “निर्णायक नया अध्याय” बताया। उन्होंने कहा, कल गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय नेताओं की उपस्थिति ऐतिहासिक थी, और आज यह समझौता ऐतिहासिक है। दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियां अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं।”

 27 तारीख का दिलचस्प संयोग

प्रधानमंत्री ने एक दिलचस्प संयोग का जिक्र करते हुए कहा, “आज 27 तारीख है, और यह सुखद संयोग है कि आज ही के दिन हम 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ यह FTA कर रहे हैं।”

पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि यह डील सिर्फ बड़े उद्योगों के लिए नहीं है, बल्कि यह हमारे किसानों और छोटे उद्योगों (MSMEs) की पहुंच यूरोपीय बाजारों तक आसान बनाएगी।

वर्तमान में दोनों के बीच 180 बिलियन यूरो का व्यापार है, जिसे यह समझौता कई गुना बढ़ा देगा।

 रक्षा और सुरक्षा: साझेदारी की नई नींव

व्यापार के अलावा, सुरक्षा पर भी बड़ा समझौता हुआ है। पीएम मोदी ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा सहयोग किसी भी रणनीतिक साझेदारी की नींव होती है।

अब भारत और यूरोप ‘को-डेवलपमेंट’ और ‘को-प्रोडक्शन’ (सह-निर्माण) की दिशा में आगे बढ़ेंगे। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी सहयोग का दायरा बढ़ाया जाएगा।

यूरोपीय नेताओं ने क्या कहा?

  • एंटोनियो कोस्टा (अध्यक्ष, यूरोपीय परिषद): उन्होंने भारत को एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बताया। कोस्टा ने कहा, “सुरक्षा के बिना समृद्धि संभव नहीं है। यह समझौता एक नियम-आधारित ग्लोबल ऑर्डर को मजबूत करेगा और 2 अरब लोगों का एक विशाल बाजार तैयार करेगा।”

  • उर्सुला वॉन डेर लेयेन (अध्यक्ष, यूरोपीय आयोग): उन्होंने कहा कि यह समझौता “भारतीय कौशल (Skill)” को “यूरोपीय तकनीक (Tech)” के साथ जोड़ता है। ऐसे समय में जब व्यापार को हथियार (Weaponization of Trade) की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, यह डील रणनीतिक निर्भरता को कम करेगी।

(Conclusion) इस समझौते के साथ ही भारत ने वैश्विक पटल पर यह साबित कर दिया है कि वह न केवल एक बड़ा बाजार है, बल्कि एक जिम्मेदार और शक्तिशाली भागीदार भी है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि यह ऐतिहासिक डील धरातल पर कितनी जल्दी उतरती है।