CDSCO के ड्रग अलर्ट में हिमाचल प्रदेश की 43 दवाओं के सैंपल फेल हो गए हैं। इस साल अब तक कुल 264 दवाओं के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतर पाए हैं।
हिमाचल के फार्मा उद्योग पर उठे गंभीर सवाल: CDSCO जांच में 43 दवाओं के सैंपल फेल, कैंसर-किडनी जैसी दवाइयां मानकों पर नहीं उतरीं खरी”
शिमला/बद्दी: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश में निर्मित दवाओं की गुणवत्ता एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर जांच के घेरे में आ गई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी मई महीने के ‘ड्रग अलर्ट’ (Drug Alert) में हिमाचल प्रदेश में बनी 43 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच (Quality Test) में फेल पाए गए हैं।
देशभर में कुल 157 दवाओं के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा अकेले हिमाचल प्रदेश का है।
इस रिपोर्ट ने एशिया के सबसे बड़े फार्मा हब कहे जाने वाले बद्दी और आसपास के फार्मा उद्योगों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हिमाचल प्रदेश के फार्मा उद्योग के लिए साल 2026 अब तक गुणवत्ता के मोर्चे पर बेहद खराब रहा है। पिछले पांच महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो प्रदेश की कुल 264 दवाओं के सैंपल जांच में फेल हो चुके हैं:
| महीना (वर्ष 2026) | फेल हुए सैंपल्स की संख्या |
| जनवरी | 71 |
| फरवरी | 73 |
| मार्च | 76 |
| अप्रैल | 31 |
| मई | 43 |
| कुल (Total) | 264 दवाएं |
मई महीने की रिपोर्ट के अनुसार, जिन 43 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, उनका उत्पादन मुख्य रूप से तीन जिलों में किया जा रहा था:
सोलन: 30 कंपनियां
सिरमौर: 11 कंपनियां
ऊना: 2 कंपनियां
इस गंभीर मामले पर राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि जिन कंपनियों के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं, उनके खिलाफ ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट’ के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही, बाजार में मौजूद इन सभी खराब दवाओं के स्टॉक को तुरंत वापस मंगाने (Recall) के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
विटामिन से लेकर कैंसर और किडनी तक की गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां इस जांच में फेल हुई हैं। यहां कुछ प्रमुख कंपनियों और उनकी दवाओं की सूची दी गई है:
| कंपनी का नाम (स्थान) | किस बीमारी/उपयोग की दवा |
| केसपिन (कालाअंब) | विटामिन-ई (लगातार 3 सैंपल फेल) |
| मार्क लैब (बद्दी) | किडनी रोग |
| अल्ट्रा ड्रग | बुखार |
| विंग्स बायोटेक | कैंसर |
| जेएमएम फॉर्म्युलेशन | संक्रमणरोधी (Anti-Infection) |
| विंग्स कंपनी (बद्दी) | कोलेस्ट्रॉल |
| स्पेन फॉर्म्युलेशन | मिर्गी (Epilepsy) |
| लीफोर्ड हेल्थकेयर (बद्दी) | कब्ज |
| स्विस गार्नियर | ब्लड शुगर |
| वोजमेड फार्मा | मधुमेह (Diabetes) |
| एक्सनोन | अस्थमा |
इसके अलावा मर्टिन एंड ब्राउन (एसिडिटी), क्रेस्ट लाइफ साइंस (सूखी खांसी), सेपनिक्स लाइफ साइंस (जोड़ों का दर्द), मार्ग लैब (आयरन की कमी), पलेना रेमिडीज (एलर्जी), और मोयोसा फार्मा (मसूड़ों की बीमारी) जैसी कई अन्य कंपनियों के उत्पाद भी सीडीएससीओ की गुणवत्ता जांच में पूरी तरह से फेल साबित हुए हैं।
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