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हिमाचल : किन्नौर में बादल फटने से तबाही, लाखों का नुकसान

किन्नौर में कुदरत का कहर: काचरंग में बादल फटने से आई भीषण बाढ़, स्कूल के रास्ते बंद और पेयजल संकट गहराया” 

किन्नौर: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले किन्नौर में एक बार फिर कुदरत ने अपना रौद्र रूप दिखाया है। जिले के निचार खंड के अंतर्गत आने वाले काचरंग इलाके में मंगलवार देर रात अचानक बादल फटने (Cloudburst) से नाले में भयंकर बाढ़ आ गई।

इस अचानक आई जलप्रलय से इलाके में लाखों रुपये की संपत्ति बह गई है। हालांकि, सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि इस भयानक प्राकृतिक आपदा में किसी भी प्रकार के जानी नुकसान (जनहानि) की सूचना नहीं है।

रात 3 बजे आई तबाही, जल शक्ति विभाग को लगा लाखों का चूना

‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार रात करीब 3 बजे जब लोग गहरी नींद में सो रहे थे, तभी आसमान से आफत बरस पड़ी और नाले का जलस्तर अचानक भयानक रूप से बढ़ गया।

पानी के इस तेज बहाव और मलबे की चपेट में आने से जल शक्ति विभाग का इंफ्रास्ट्रक्चर तहस-नहस हो गया है।

  • मलबे की चपेट में आने से विभाग की पेयजल पाइपलाइनें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
  • दो अलग-अलग जगहों पर बने पानी के इंटेक टैंक (Intake Tank) को भारी नुकसान पहुंचा है।
  • जल आपूर्ति ठप होने से पूरे क्षेत्र में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

रास्ते हुए बंद, गांव और मिडल स्कूल का संपर्क कटा

बाढ़ के पानी के साथ पहाड़ों से गिरे भारी-भरकम पत्थरों और गाद ने इलाके की सूरत बिगाड़ दी है। इस अतिरिक्त मलबे और तेज बहाव के कारण गांव और स्थानीय मिडल स्कूल को जोड़ने वाला मुख्य आम रास्ता पूरी तरह से बाधित हो गया है।

विशालकाय पत्थरों के रास्ते में आ जाने से ग्रामीणों की आवाजाही पूरी तरह से ठप पड़ गई है।

प्रशासन मौके पर: तहसीलदार ने दिए राहत कार्य के निर्देश

बुधवार सुबह जैसे ही बादल फटने और बाढ़ आने की सूचना मिली, स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया।

तहसीलदार निचार नेगी और राजस्व विभाग (Revenue Department) की टीम ने अलसुबह ही मौके पर पहुंचकर स्थिति का बारीकी से जायजा लिया।

“बादल फटने के बाद आई इस बाढ़ के कारण किसी भी तरह का जानी नुकसान नहीं हुआ है। हालांकि, इससे जल शक्ति विभाग की लगभग 100 मीटर तक पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके साथ ही एक मुख्य रास्ता भी भारी पत्थरों के आने से बंद हो गया है। विभागों को तुरंत राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।” – निचार नेगी, तहसीलदार

प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता फिलहाल पेयजल आपूर्ति को सुचारू रूप से बहाल करना और भारी मशीनों की मदद से बंद रास्तों को जल्द से जल्द खोलना है, ताकि प्रभावित ग्रामीणों को फौरी राहत मिल सके।

Santosh SETH

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