Chenab-Beas link tunnel project and Rohtang valley mountains in Himachal Pradesh

हिमाचल : चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना; बूंद बूंद पानी को पाकिस्तान तरसेगा

चिनाब-ब्यास लिंक टनल का तकनीकी सर्वे पूरा: पाकिस्तान बूंद-बूंद को तरसेगा, उत्तर भारत के लिए साबित होगी वरदान “

शिमला:   द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

केंद्र सरकार की एक बेहद महत्वाकांक्षी ‘चिनाब-ब्यास लिंक सुरंग परियोजना’ (Chenab-Beas Link Tunnel Project) को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है।

इस प्रोजेक्ट के भू-वैज्ञानिक (Geological) सर्वेक्षण ने परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता पर अपनी मजबूत मुहर लगा दी है।

इस महात्वाकांक्षी कदम से न केवल उत्तर भारत के राज्यों की पानी और बिजली की किल्लत हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी, बल्कि भारत के इस मास्टरस्ट्रोक से पाकिस्तान जाने वाले पानी पर भी बड़ा लगाम लगेगा।

‘The Politics Again’ की इस विस्तृत रिपोर्ट में जानिए इस प्रोजेक्ट से जुड़ी हर अहम जानकारी:

रोहतांग की मजबूत चट्टानें बनीं परियोजना का आधार

भू-वैज्ञानिकों ने हाल ही में कोकसर और रोहतांग क्षेत्र की चट्टानों की गहन टेस्टिंग की है। सर्वेक्षण के परिणामों ने स्पष्ट कर दिया है कि यहां की चट्टानें प्राकृतिक रूप से बेहद ठोस और मजबूत हैं।

  • चट्टानों की प्रकृति: इस इलाके में मुख्य रूप से ‘रोहतांग नीस सम्मिश्रण’, ‘क्वार्टजो-फेल्डस्पैथिक नीस’ और ‘बायोटाइट नीस’ चट्टानें पाई जाती हैं।

  • लैंडस्लाइड का खतरा न के बराबर: वैज्ञानिकों के अनुसार, ये चट्टानें इतनी मजबूत हैं कि सुरंग और बांध निर्माण के दौरान भूस्खलन (Landslide) की आशंका लगभग न के बराबर है।

  • भौगोलिक स्थिति: कोकसर और रोहतांग की घाटी ‘U’ आकार (U-Shape) की है, जिसकी चोटियां समुद्र तल से 3,095 मीटर से लेकर 6,517 मीटर की ऊंचाई तक फैली हुई हैं।

पहाड़ों का सीना चीरकर ब्यास में मिलेगा चंद्रा नदी का पानी

इस पूरी परियोजना का मुख्य उद्देश्य चिनाब नदी की प्रमुख सहायक नदी ‘चंद्रा’ के पानी को इन विशाल चट्टानों के बीच से सुरंग (Tunnel) के जरिए निकालकर ‘ब्यास नदी’ में मिलाना है।

ब्यास नदी से होते हुए यह अथाह जलराशि सीधे भाखड़ा बांध (Bhakra Dam) में पहुंचेगी। चंद्रा नदी के पानी को मोड़ने और नियंत्रित करने के लिए पहाड़ों के बीच 19 मीटर ऊंचे और 96.05 मीटर लंबे बैराज का निर्माण किया जाएगा।

उत्तर भारत के लिए ‘गेम चेंजर’, खत्म होगी पानी-बिजली की किल्लत

गर्मी के मौसम में उत्तर भारत को अक्सर पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ता है। लेकिन चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना के पूरा होने के बाद यह कमी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

  • बिजली का महा-उत्पादन: पानी का रुख भारत की ओर मुड़ने से यहां बड़े पैमाने पर पनबिजली (Hydroelectricity) का उत्पादन किया जाएगा।

  • राज्यों को लाभ: इस परियोजना से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के किसानों और आम नागरिकों को सिंचाई और पीने के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा।

2,620 करोड़ का प्रोजेक्ट: “पहले भारतीयों का हक”

हिमाचल प्रदेश के गवर्नर कविंदर गुप्ता ने 2,620 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस प्रस्तावित टनल परियोजना को ‘राष्ट्रीय हित’ में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम बताया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के जल संसाधनों पर सबसे पहला अधिकार हमारे अपने देश के नागरिकों का है।

गवर्नर ने कहा, “यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हमारी नदियों का पानी सबसे पहले पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों की जरूरतों को पूरा करे।”

पाकिस्तान पर रणनीतिक प्रहार

इस परियोजना का एक बड़ा रणनीतिक पहलू यह है कि अब तक जो पानी निर्बाध रूप से पाकिस्तान की ओर बह जाता था, अब उसे भारत अपने उपयोग के लिए रोक लेगा।

रोहतांग की पहाड़ियों के बीच से चिनाब का पानी ब्यास में मोड़े जाने से पाकिस्तान को जाने वाले पानी में भारी कमी आएगी, जिससे पड़ोसी देश पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस सकता है।

यह सिंधु जल समझौते के तहत भारत के अपने हिस्से के पानी का अधिकतम उपयोग करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।