हिमाचल की अनोखी शादी: दो भाइयों की एक पत्नी ने बेटी को दिया जन्म, 'बहुपति प्रथा' चर्चा में
हिमाचल प्रदेश की अनोखी शादी: दो भाइयों की एक पत्नी ने दिया बेटी को जन्म, ‘बहुपति प्रथा’ फिर से सुर्खियों में
शिमला/सिरमौर: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र से एक अनोखी और पारंपरिक शादी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है।
इस इलाके के एक गांव में रहने वाले दो सगे भाइयों—कपिल और प्रदीप—ने जुलाई 2025 में एक ही महिला, सुनीता से विवाह किया था।
यह शादी स्थानीय ‘बहुपति प्रथा’ के तहत संपन्न हुई थी। शादी के करीब 10 महीने बाद अब सुनीता ने एक बच्ची को जन्म दिया है, जिसके बाद से यह परिवार सोशल मीडिया पर फिर से सुर्खियों में छा गया है।
लोग जहां इस परिवार को बच्ची के जन्म पर बधाइयां दे रहे हैं, वहीं कई तरह के कानूनी और सामाजिक सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
जन्म प्रमाण पत्र में किसका नाम?
बच्ची के जन्म के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि उसका ‘वास्तविक पिता’ किसे माना जाएगा और जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) में पिता के स्थान पर किसका नाम दर्ज होगा।
स्थानीय परंपरा और मौजूदा नियमों के अनुसार, ऐसे मामलों में बड़े भाई को ही आधिकारिक तौर पर महिला का पति और बच्चे का पिता माना जाता है।
इसलिए, बच्ची के जन्म प्रमाण पत्र में बड़े भाई का ही नाम दर्ज किया जाएगा, भले ही बायोलॉजिकल पिता कोई भी हो।
क्या है ‘बहुपति प्रथा’ (Fraternal Polyandry)?
हिमाचल प्रदेश और कुछ अन्य पहाड़ी इलाकों में सदियों से यह परंपरा चली आ रही है, जिसे ‘फ्रेटर्नल पॉलीएंड्री’ (एक महिला का कई भाइयों से विवाह) कहा जाता है।
पुराने समय में इस प्रथा का मुख्य उद्देश्य कृषि भूमि के बंटवारे को रोकना और पारिवारिक संपत्ति व एकता को बनाए रखना था।
इस व्यवस्था में पत्नी सभी भाइयों के साथ रहती है और सभी को समान दर्जा देती है। वह कब किसके साथ रहेगी, इसका निर्णय वह स्वयं करती है।
कानूनी स्थिति और ऐतिहासिक संदर्भ
चूंकि भारतीय कानून में बहुविवाह या बहुपति प्रथा को कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है, इसलिए दस्तावेजों में बड़े भाई को ही महिला का आधिकारिक पति माना जाता है।
इस प्रथा का पहाड़ी समाज में गहरा ऐतिहासिक महत्व रहा है। यहां तक कि हिमाचल प्रदेश के निर्माता और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. वाई.एस. परमार ने भी 1975 में बहुपति प्रथा पर एक विस्तृत किताब लिखी थी, जिसमें उन्होंने इस सामाजिक व्यवस्था के वैज्ञानिक और भौगोलिक कारणों पर गहराई से प्रकाश डाला था।
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