Flash floods and landslide destruction in Arunachal Pradesh villages

अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ से भयंकर तबाही

अरुणाचल प्रदेश में कुदरत का कहर: बादल फटने जैसी बारिश से भारी तबाही, बहे पुल और डूबे गांव”

ईटानगर: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में कुदरत ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है। राज्य में भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ (Flash Floods) ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है।

इसका सबसे ज्यादा असर निचले सुबनसिरी और केयी पन्योर जिलों में देखने को मिला है, जहां मूसलाधार बारिश के कारण कई गांव पूरी तरह से पानी में डूब गए हैं।

बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को भारी नुकसान पहुंचा है और मुख्य हाईवे पुल पानी के तेज बहाव में बह गया है।

कहां और कितना हुआ नुकसान?

अचानक आई इस भीषण बाढ़ से जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह 6:30 बजे के तुरंत बाद बाढ़ का पानी तेजी से रिहायशी इलाकों में घुसने लगा। नुकसान के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • तोरू सर्कल के अंतर्गत आने वाले यियी-I और यियी-II गांवों के साथ-साथ लुक्सिन गांव में बाढ़ ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया है।
  • लुक्सिन गांव में कई मकान और इमारतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं।
  • किसानों की अनानास, केले और संतरे जैसी बागवानी फसलों के साथ-साथ कृषि को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
  • यियी गांव का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है। राहत की बात यह है कि स्थानीय लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया, जिससे अब तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है।

नीपको (NEEPCO) कॉलोनी और मुख्य पुल तबाह

बाढ़ का यह कहर केवल गांवों तक ही सीमित नहीं रहा। केयी पन्योर ज़िले के याज़ाली स्थित पोसा में ‘NEEPCO’ कॉलोनी में नदियों का जलस्तर बढ़ने से भारी तबाही हुई है।

शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, पानी के तेज बहाव में 15 रिहायशी क्वार्टर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। इसके अलावा, इलाके को जोड़ने वाला एक मुख्य हाईवे पुल भी बह गया है, जिससे कई क्षेत्रों का सड़क संपर्क पूरी तरह से टूट गया है।

बादल फटने जैसी बारिश बनी मुख्य वजह

मौसम विभाग के अनुसार, यह तबाही कई दिनों की लगातार बारिश का परिणाम नहीं है, बल्कि मात्र 3 घंटे (सुबह 6 से 9 बजे) के भीतर हुई अत्यधिक और तेज बारिश के कारण हुई है।

मौसम वैज्ञानिकों ने इसे ‘बादल फटने जैसी घटना’ करार दिया है। पूर्वी हिमालय के ऊबड़-खाबड़ इलाकों में जब बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होती है, तो पानी तेजी से पहाड़ों की ढलानों से होकर नालों और नदियों में पहुंचता है। इसी अचानक जल प्रवाह के कारण ‘फ्लैश फ्लड’ (अचानक बाढ़) के हालात पैदा हो गए।

मौसम विभाग (IMD) का अलर्ट जारी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगामी दिनों के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। पानी से पूरी तरह संतृप्त हो चुकी मिट्टी, उफान पर बहती नदियों और लगातार सक्रिय मानसून के कारण अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में अभी भी भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बरकरार है।

‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर बने रहने की अपील की है। विस्तृत नुकसान की रिपोर्ट अभी तैयार की जा रही है।