मऊ जिले के मोहम्मदाबाद गोहना विधानसभा क्षेत्र में आयोजित बसपा के महासम्मेलन में जेके आजाद को प्रत्याशी घोषित किए जाने पर स्थानीय कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर जोरदार विरोध किया।
मऊ: बसपा के महासम्मेलन में ‘बाहरी’ प्रत्याशी पर भड़के कार्यकर्ता, दिखाए काले झंडे, एक गिरफ्तार”
मऊ : THE POLITICS AGAIN डेस्क: संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में आगामी 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर आयोजित बहुजन समाज पार्टी (BSP) का कार्यकर्ता महासम्मेलन अचानक अखाड़े में तब्दील हो गया।
जिले की मोहम्मदाबाद गोहना (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र में रविवार को आयोजित इस महासम्मेलन में उस समय भारी हंगामा और बवाल शुरू हो गया, जब मंच से जे.के. आजाद को इस विधानसभा का प्रभारी प्रत्याशी घोषित किया गया।
घोषणा होते ही कार्यक्रम में मौजूद स्थानीय कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अपनी सीटों से उठकर काले झंडे लहराने शुरू कर दिए और ‘जेके आजाद मुर्दाबाद’ के नारे लगाकर कड़ा विरोध जताया।
इस हंगामे की मुख्य वजह प्रत्याशी का ‘बाहरी’ होना बताया जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे नाराज कार्यकर्ताओं का आरोप था कि:
जे.के. आजाद मूल रूप से आजमगढ़ के निवासी हैं।
मोहम्मदाबाद गोहना विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय कार्यकर्ता वर्षों से जमीन पर संगठन को मजबूत करने के लिए खून-पसीना एक कर रहे हैं, लेकिन टिकट बंटवारे में उनकी घोर अनदेखी की गई है।
कार्यकर्ताओं ने पार्टी हाईकमान से स्पष्ट मांग की है कि इस विधानसभा क्षेत्र से किसी स्थानीय और जैमीनी नेता को ही प्रभारी प्रत्याशी घोषित किया जाए।
कार्यक्रम सुचारू रूप से चल रहा था, लेकिन जैसे ही जे.के. आजाद के नाम की आधिकारिक घोषणा हुई, माहौल पूरी तरह से तनावपूर्ण हो गया।
कुछ कार्यकर्ता अपनी सीटों से खड़े हो गए और मंच की ओर काले झंडे दिखाते हुए जोरदार नारेबाजी करने लगे।
अचानक हुए इस विरोध प्रदर्शन से कार्यक्रम स्थल पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
हंगामे को बढ़ता देख कार्यक्रम स्थल पर मौजूद पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को तुरंत मोर्चा संभालना पड़ा। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
इस दौरान विरोध प्रदर्शन कर रहे एक युवक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और उसे मोहम्मदाबाद गोहाना कोतवाली भेज दिया। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल की कड़ी निगरानी में कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया।
इस महत्वपूर्ण महासम्मेलन में बसपा के कई बड़े और वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे, जिनकी मौजूदगी में यह पूरा बवाल हुआ। मंच पर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर
पूर्व राज्यसभा सांसद सलीम अंसारी
प्रोफेसर इंदु चौधरी
पूर्व एमएलसी दिनेश चंद्र
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए रणनीतियों पर चर्चा करना था।
महासम्मेलन में हुए इस खुले विरोध प्रदर्शन के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय कार्यकर्ताओं की यह नाराजगी और टिकट को लेकर हुआ यह खुला विद्रोह बसपा के लिए एक खतरे की घंटी है।
आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी हाईकमान को संगठन के भीतर पनप रहे इस असंतोष और गुटबाजी को जल्द से जल्द दूर करने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
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