Strict new social media rules in India regarding the removal of objectionable content within 2 hours.

सोशल मीडिया पर सरकार की सख्ती: आपत्तिजनक पोस्ट 2 घंटे में हटेंगे

सोशल मीडिया पर अब और सख्ती: आपत्तिजनक पोस्ट हटाने के लिए सिर्फ 2 घंटे का समय, AI वीडियो पर नए नियम”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

भारत में सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग, फर्जी खबरों और डीपफेक (Deepfake) वीडियोज पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक के सबसे सख्त नियम लागू कर दिए हैं।

नए डिजिटल अनुपालन दिशा-निर्देशों के तहत अब YouTube, Instagram और X (Twitter) जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने के लिए 24 घंटे नहीं, बल्कि महज 120 मिनट (2 घंटे) का समय मिलेगा।

सरकार का उद्देश्य डिजिटल दुनिया में तेजी से वायरल होने वाले नुकसानदायक कंटेंट को रोकना है ताकि पीड़ितों को मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न से बचाया जा सके।

अब सिर्फ 2 घंटे में होगा एक्शन

नए नियमों के लागू होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही काफी बढ़ गई है।

  • अगर किसी कंटेंट को ‘संवेदनशील’ या ‘गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला’ माना जाता है, तो उसे रिपोर्ट होने के महज 2 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।

  • पहले इस तरह के मामलों में कंपनियों को काफी ज्यादा समय मिलता था, जिससे फर्जी वीडियो या निजी तस्वीरें लाखों लोगों तक पहुंच जाती थीं।

  • इसके अलावा, अदालत या सरकार द्वारा अवैध घोषित किए गए कंटेंट को हटाने की समय-सीमा भी 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है।

किन मामलों में तुरंत हटाना होगा कंटेंट?

नई गाइडलाइन खास तौर पर उन मामलों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिनसे किसी की प्रतिष्ठा, निजता या सुरक्षा को खतरा हो:

  1. किसी की निजी फोटो या वीडियो को उसकी अनुमति के बिना इंटरनेट पर साझा करना।

  2. AI की मदद से बनाए गए डीपफेक वीडियो, जिसमें किसी का चेहरा या आवाज बदलकर उसे बदनाम किया गया हो।

AI से बने कंटेंट पर ‘डिस्क्लेमर’ अनिवार्य

सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े नियम भी बेहद सख्त कर दिए हैं।

  • अगर कोई क्रिएटर AI की मदद से फोटो, वीडियो या ऑडियो बनाता है, तो उसे अपलोड करते समय स्पष्ट ‘डिस्क्लेमर’ और मेटाडेटा डालना होगा कि यह सामग्री AI द्वारा जनरेटेड है।

  • अगर क्रिएटर ऐसा नहीं करता, तो प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी होगी कि वह उस पर वॉटरमार्क लगाए या उसे तुरंत हटा दे।

  • हालांकि, बेसिक फोटो एडिटिंग या कलर करेक्शन इस नियम के दायरे में नहीं आएंगे।

बड़ी टेक कंपनियों पर बढ़ा कानूनी दबाव: छिन सकती है ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा

सरकार ने इन नियमों को सिर्फ सलाह नहीं रखा है, बल्कि इनका कड़ाई से पालन न करने पर सोशल मीडिया कंपनियों की ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbor) सुरक्षा छिन सकती है।

आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली यह सुरक्षा कंपनियों को यूजर्स द्वारा डाले गए कंटेंट के लिए सीधे जिम्मेदार होने से बचाती है।

अगर ये प्लेटफॉर्म तय समय में कंटेंट नहीं हटाते हैं, तो उन पर और उनके अधिकारियों पर सीधे क्रिमिनल और सिविल केस दर्ज हो सकते हैं।

आम यूजर्स पर क्या होगा असर?

इन नियमों से आम यूजर्स के लिए सोशल मीडिया पहले से ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा। विवादित पोस्ट और फेक न्यूज पर तुरंत लगाम लगेगी।

हालांकि, 2 घंटे की समय-सीमा के कारण कंपनियों को ‘AI मॉडरेशन’ का सहारा लेना पड़ेगा, जिससे कई बार व्यंग्य (Satire) या वैध समाचार रिपोर्टिंग वाले पोस्ट भी गलती से डिलीट हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, आने वाले समय में सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना टेक कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।