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सरकार का बड़ा फैसला, चांदी आयात को ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाला

सरकार का बड़ा फैसला: विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए चांदी के आयात पर सख्ती, ‘मुक्त’ से हटाकर ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाला”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

देश में चांदी की बढ़ती मांग, कमजोर होते रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने एक बेहद अहम फैसला लिया है।

सरकार ने चांदी की कई श्रेणियों के आयात नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए इसे “मुक्त आयात” (Free Import) व्यवस्था से हटाकर “प्रतिबंधित आयात” (Restricted Import) की श्रेणी में डाल दिया है।

इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि अब देश के आयातकों को कुछ खास प्रकार की चांदी विदेश से मंगाने के लिए सरकार से विशेष मंजूरी और लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।

किन श्रेणियों पर लागू होगी पाबंदी?

सरकार ने आयात नीति अनुसूची और आईटीसी (एचएस) वर्गीकरण में संशोधन के जरिए यह बदलाव लागू किया है। नई अधिसूचना के मुताबिक, अब निम्नलिखित प्रकार की चांदी के आयात पर सख्ती लागू की गई है:

  • 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली चांदी की सिल्लियां

  • बिना ढली चांदी

  • अर्धनिर्मित चांदी

  • पाउडर के रूप में आने वाली चांदी

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

जानकारों के मुताबिक, यह कदम मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा को देश से बाहर जाने से रोकने के लिए उठाया गया है।

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और डॉलर की बढ़ती मांग के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव है।

सरकार अब चांदी को सिर्फ एक सामान्य धातु नहीं, बल्कि व्यापार संतुलन (Trade Balance) से जुड़ी एक संवेदनशील वस्तु के तौर पर देख रही है।

  • सोने पर भी हो चुकी है सख्ती: गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही सरकार ने सोने और अन्य कीमती धातुओं पर सीमा शुल्क (Custom Duty) 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था।

  • इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी।

घरेलू बाजार और उद्योगों पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत की चांदी का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में इस सख्ती का सीधा असर घरेलू बाजार और उद्योगों पर पड़ना तय है:

  • बढ़ सकते हैं दाम: बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, आयात प्रक्रिया कठिन होने से देश में चांदी की उपलब्धता कम हो सकती है।

  • इससे स्थानीय बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ेगा और घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से कहीं अधिक हो सकती हैं।

  • उद्योगों में घबराहट: चांदी का इस्तेमाल केवल निवेश के लिए नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा (Solar Energy) और मशीन निर्माण जैसे अहम उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है।

  • आपूर्ति घटने की आशंका के चलते कारोबारी पहले से अधिक भंडारण (Hoarding) शुरू कर सकते हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है।

आने वाले समय में घरेलू वायदा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है, जिससे त्योहारी और शादी के सीजन में आम जनता को चांदी की भारी कीमतें चुकानी पड़ सकती हैं।

Santosh SETH

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