B.Tech student Yara Mahesh working on his laptop after receiving government scholarship.

सरकारी छात्रवृत्ति से संवरा B.Tech छात्र यारा महेश का भविष्य

आर्थिक तंगी को मात देकर यारा महेश ने छुई तकनीकी ऊंचाइयां: सरकारी छात्रवृत्ति से संवर रहा B.Tech का सपना”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

उच्च शिक्षा युवाओं के लिए एक मजबूत करियर और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का बेहतरीन अवसर है।

लेकिन, अक्सर आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी होनहार छात्रों के सपनों की राह में रोड़ा बन जाती है।

हालांकि, सही समय पर मिलने वाली सरकारी वित्तीय सहायता कैसे किसी छात्र की जिंदगी और करियर की दिशा बदल सकती है, इसकी एक शानदार मिसाल हैं 21 वर्षीय यारा महेश।

वित्तीय बाधाओं के बीच नहीं छोड़ी उम्मीद

जनरल-ईडब्ल्यूएस (General-EWS) श्रेणी से आने वाले यारा महेश वर्तमान में बी.टेक द्वितीय वर्ष के छात्र हैं।

उच्च शिक्षा से जुड़े भारी-भरकम खर्चों—जैसे कॉलेज की फीस, हॉस्टल, अध्ययन सामग्री और कौशल विकास—का वहन करना महेश और उनके परिवार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था।

आर्थिक तंगी के बावजूद महेश ने अपनी तकनीकी क्षमताओं को निखारने और टेक्नोलॉजी सेक्टर में करियर बनाने का अपना दृढ़ संकल्प कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।

52,540 रुपये की छात्रवृत्ति से मिली नई उड़ान

महेश के संघर्षों को तब एक नई दिशा मिली जब वर्ष 2025 में उन्हें सरकार की ओर से 52,540 रुपये की छात्रवृत्ति सहायता प्रदान की गई।

इस वित्तीय सहायता से उनके परिवार पर पड़ा आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हो गया। इस छात्रवृत्ति के पैसों से महेश ने अपनी कॉलेज फीस, हॉस्टल, भोजन, इंटरनेट और शैक्षणिक संसाधनों का खर्च आसानी से पूरा किया।

छात्रवृत्ति से खरीदा लैपटॉप, AI में कर रहे रिसर्च

इस सरकारी सहायता का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि महेश अपने लिए एक लैपटॉप खरीद सके, जो एक इंजीनियरिंग छात्र के लिए सबसे अहम हथियार है।

  • लैपटॉप की मदद से उन्होंने अपनी प्रोग्रामिंग, प्रोजेक्ट वर्क और ऑनलाइन लर्निंग को और बेहतर किया।

  • अपनी द्वितीय वर्ष की इंटर्नशिप के दौरान, महेश ने ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) और ‘मशीन लर्निंग’ (ML) तकनीकों का उपयोग करके त्वचा कैंसर (Skin Cancer) के वर्गीकरण पर एक बेहतरीन शोध पत्र (Research Paper) तैयार किया है, जो वर्तमान में प्रकाशन की प्रक्रिया में है।

आज महेश बिना किसी आर्थिक दबाव के अपनी पढ़ाई पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं। यारा महेश की यह सफलता की कहानी स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि समय पर मिलने वाली सरकारी शैक्षिक सहायता किस तरह छात्रों को वित्तीय बाधाओं से निकालकर उन्हें एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाती है।