भारत के प्रदर्शनों को विदेशी नेटवर्क का समर्थन, अमेरिकी जांच तेज!
भारत के विरोध-प्रदर्शनों को नेविल रॉय सिंघम के विदेशी नेटवर्क का समर्थन, अमेरिकी कांग्रेस की रडार पर ‘टाइकून’
नई दिल्ली/वाशिंगटन: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत में मतदाता सूची और मताधिकार के मुद्दे को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के तार अब एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ते दिख रहे हैं।
इन प्रदर्शनों को कुछ ऐसे विदेशी समूहों का समर्थन मिल रहा है, जिन्हें कथित तौर पर शंघाई (चीन) में रह रहे अमेरिकी टेक टाइकून नेविल रॉय सिंघम (Neville Roy Singham) से फंडिंग मिलती है।
सिंघम और उनका यह फंडिंग नेटवर्क इस वक्त सीधे तौर पर अमेरिकी कांग्रेस की जांच के दायरे में है।
हालांकि, वर्तमान में इस बात का कोई सीधा सबूत नहीं मिला है कि सिंघम का नेटवर्क भारत में हो रहे इन प्रदर्शनों को प्रत्यक्ष रूप से फंड दे रहा है या संचालित कर रहा है, लेकिन वैचारिक और प्रचार के स्तर पर इस नेटवर्क का समर्थन स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
फॉक्स न्यूज का खुलासा: 101 विदेशी संगठनों की पहचान
मंगलवार को प्रकाशित ‘फॉक्स न्यूज डिजिटल’ की एक जांच रिपोर्ट में पत्रकार असरा क्यू. नोमानी ने बड़ा खुलासा किया है।
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ग्लोबल नेटवर्क: रिपोर्ट में अमेरिका सहित 9 देशों में ऐसे 101 संगठनों की पहचान की गई है, जो विश्व स्तर पर विरोध-प्रदर्शनों का समन्वय और आयोजन कर रहे हैं।
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भारत का जिक्र: इस रिपोर्ट में भारत का दो बार उल्लेख है। बताया गया है कि 16 अक्टूबर को ‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ की एक ब्रीफिंग में फ्रांस और स्पेन के साथ-साथ भारत में चल रहे प्रदर्शनों को एक साथ जोड़कर देखा गया और इसे ‘नए विद्रोह’ की राजनीतिक ताकत बताया गया।
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इंडियन अलायंस पेरिस: फ्रांस स्थित इस संगठन ने भारत और फ्रांस के विरोध प्रदर्शनों के संदेशों को आपस में जोड़ा है और मैनहट्टन के ‘पीपल्स फोरम’ के साथ साझेदारी की है।
‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ और ‘ट्राइकॉन्टिनेंटल’ का भारत पर एजेंडा
विदेशी संगठनों ने भारत की आंतरिक राजनीति पर लगातार बयानबाजी की है:
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जंतर-मंतर से पोस्ट: ‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ ने 12 अक्टूबर को ‘एक्स’ पर लिखा, “हम जंतर-मंतर के बैरिकेड्स से लिख रहे हैं, जहां भारत सरकार ने मताधिकार छीने जाने का विरोध कर रहे नागरिकों के खिलाफ सशस्त्र बल तैनात किए हैं।”
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ट्राइकॉन्टिनेंटल (विजय प्रसाद): इसके प्रमुख विजय प्रसाद ने 18 अक्टूबर को पेरिस, नई दिल्ली और ब्यूनस आयर्स का जिक्र करते हुए लिखा कि “गुस्सा ही ताकत बन सकता है।”
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ब्रेकथ्रू न्यूज: इस मीडिया आउटलेट ने 12 से 16 अक्टूबर के बीच भारत के प्रदर्शनों को प्रमुखता से कवर किया और पुलिस की कार्रवाई को ‘अभूतपूर्व दमन’ करार दिया।
सिंघम पर कसा अमेरिकी कांग्रेस का शिकंजा
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ‘ब्रेकथ्रू न्यूज’, ‘कोडपिंक’ और ‘पार्टी फॉर सोशलिज्म एंड लिबरेशन’ जैसे संगठनों को नेविल रॉय सिंघम से भारी फंडिंग मिलती है।
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जुलाई 2026 में जेसन स्मिथ की अध्यक्षता वाली अमेरिकी ‘हाउस वेज एंड मीन्स कमिटी’ ने इन संगठनों को समन जारी किया था।
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(दिलचस्प बात यह है कि जेसन स्मिथ ने इसी हफ्ते मुंबई में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात की है)।
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‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ और ‘सीबीएस न्यूज’ के अनुसार, मैनहट्टन में एक फेडरल ग्रैंड ज्यूरी सिंघम के खिलाफ जांच कर रही है।
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हालांकि, न्याय विभाग ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सबसे पहले 2023 में ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने सिंघम के इस विशाल फंडिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था।
📊विदेशी नेटवर्क और सिंघम कनेक्शन (एक नज़र में)
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प्रमुख बिंदु (Key Entities/Aspects) |
विस्तृत भूमिका और विवरण (Details) |
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👤 मुख्य संदिग्ध (Key Figure) |
नेविल रॉय सिंघम (अमेरिकी टेक टाइकून, वर्तमान में शंघाई में स्थित)। |
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📰 जांच करने वाली मीडिया |
फॉक्स न्यूज डिजिटल (जांचकर्ता: असरा क्यू. नोमानी)। |
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🌐 शामिल प्रमुख विदेशी संगठन |
प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल, ट्राइकॉन्टिनेंटल, पीपल्स फोरम, ब्रेकथ्रू न्यूज, कोडपिंक। |
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📍 भारत का कनेक्शन |
मतदाता सूची विवाद और जंतर-मंतर के विरोध-प्रदर्शनों को विदेशी नैरेटिव के जरिए समर्थन। |
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⚖️ अमेरिकी कांग्रेस की जांच |
जेसन स्मिथ की अध्यक्षता वाली ‘हाउस वेज एंड मीन्स कमिटी’ द्वारा सिंघम नेटवर्क को समन। |
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🇫🇷 अन्य संगठन की भूमिका |
‘इंडियन अलायंस पेरिस’ द्वारा भारतीय प्रदर्शनों के संदेशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाना। |











