Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav and senior leader Azam Khan in a political discussion

रामपुर जेल में आजम से मिलेंगे अखिलेश, जेल से तय होगी चुनावी रणनीति ?

ईडी के नए शिकंजे के बीच अखिलेश का रामपुर दौरा: जेल में आजम खां से मुलाकात, पश्चिमी यूपी के टिकट और गठबंधन पर मंथन तय”

रामपुर/लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां के खिलाफ एक और नई एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है।

इस कानूनी शिकंजे के बीच सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का 22 अक्तूबर का रामपुर दौरा राजनीतिक गलियारों में बेहद अहम माना जा रहा है।

रामपुर जेल की चारदीवारी के भीतर सपा के इन दो शीर्ष दिग्गजों की यह मुलाकात आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से बड़े फैसलों की बुनियाद रख सकती है।

माना जा रहा है कि इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संभावित प्रत्याशियों, चुनावी मुद्दों और सपा-कांग्रेस गठबंधन के सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर विस्तृत रणनीति बनेगी।

जेल में रहकर भी सपा की धुरी हैं आजम खां

सपा शासनकाल में ‘मिनी मुख्यमंत्री’ के रूप में पहचाने जाने वाले आजम खां भले ही लंबे समय से जेल में बंद हैं और चुनावी मैदान से दूर रहे हैं, लेकिन पार्टी के नीतिगत मामलों और संगठनात्मक फैसलों में उनका प्रभाव आज भी बरकरार है।

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  • मुरादाबाद मंडल में दबदबा: पश्चिमी यूपी, खासकर मुरादाबाद मंडल में आजम खां का सियासी असर जगजाहिर है।
  • वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद मंडल की 27 में से 17 सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की थी।
  • इनमें मुरादाबाद की 6 में से 5, रामपुर की 5 में से 3, संभल की 4 में से 3, अमरोहा की 4 में से 2 और बिजनौर की 8 में से 4 सीटों पर सपा का कब्जा हुआ था।
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  • 2022 का ट्रैक रिकॉर्ड: पूरे पश्चिमी यूपी की 126 सीटों में से सपा-रालोद गठबंधन ने 41 सीटें जीती थीं, जिनमें अकेले सपा के 33 विधायक चुनकर आए थे। इस सफलता में आजम खां की रणनीतिक राय को श्रेय मिला था।

किन मुद्दों पर हो सकता है सबसे बड़ा मंथन?

 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश-आजम की इस मुलाकात में पश्चिमी यूपी की नब्ज पकड़ने वाले कई अहम बिंदुओं पर चर्चा होगी:

  1. उम्मीदवारों का चयन: दोनों प्रमुख दल (सपा और भाजपा) निजी एजेंसियों से सर्वे करा रहे हैं। ऐसे में आजम खां की राय जिताऊ चेहरों को तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है।
  2. जांच एजेंसियों का दुरुपयोग: आजम खां और उनके ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी’ पर लगातार कड़ा होता जांच एजेंसियों का शिकंजा और छात्रों का आंदोलन चुनावी मुद्दा बन सकता है।
  3. संभल विवाद और कानून व्यवस्था: संभल में हरिहर मंदिर बनाम जामा मस्जिद विवाद से भड़की हिंसा और हाल ही में सदन में पेश हुई न्यायिक जांच रिपोर्ट को लेकर भी चुनावी नैरेटिव तैयार किया जा सकता है।
  4. सपा-कांग्रेस सीट बंटवारा: विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की प्रबल संभावनाएं हैं। पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर कांग्रेस भी अपनी दावेदारी जता रही है।
  5. ऐसे में आजम खां के अनुभवों का इस्तेमाल सीटों के बंटवारे और चुनावी तालमेल में संतुलन साधने के लिए किया जाएगा।

“सियासी बातें होना स्वाभाविक”: फिरोज खां मुरादाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव प्रभारी

फिरोज खां ने इस मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जेल में आजम खां की सेहत का हाल जानने जा रहे हैं क्योंकि उनकी तबीयत काफी समय से नासाज है।

हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब पार्टी के दो इतने बड़े शीर्ष नेता एक साथ बैठेंगे, तो राजनीतिक और चुनावी विषयों पर स्वाभाविक रूप से बातचीत होगी।

📊 अखिलेश-आजम मुलाकात और पश्चिमी यूपी का सियासी गणित

प्रमुख बिंदु (Key Highlights) विस्तृत विवरण (Details)
📍 मुलाकात का स्थान रामपुर जिला कारागार (Rampur Jail)
🗓️ तारीख 22 अक्तूबर 2026
⚖️ हालिया कानूनी घटनाक्रम प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा आजम खां पर एक और नई FIR दर्ज
🎯 मुख्य सियासी एजेंडा पश्चिमी यूपी के उम्मीदवार चयन, चुनावी मुद्दे और सपा-कांग्रेस गठबंधन पर चर्चा
🏛️ 2022 में मुरादाबाद मंडल प्रदर्शन कुल 27 सीटों में से 17 सीटों पर सपा का कब्जा रहा था
🔥 प्रमुख चुनावी मुद्दे जौहर यूनिवर्सिटी पर एजेंसियों की कार्रवाई, संभल हिंसा की न्यायिक रिपोर्ट और अल्पसंख्यकों के हक