Breaking News

विचार प्रवाह – बांग्लादेश: नए जनादेश की कसौटी और भारत से रिश्तों का भविष्य

“बांग्लादेश की राजनीति ने एक लंबा चक्कर काटकर अपनी धुरी फिर वहीं पा ली है, जहां से दो दशक पहले वह भटकी थी”

ढाका/नई दिल्ली: THE POLITICS AGAIN : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

लगभग 20 साल के अंतराल और पिछले डेढ़ साल की अंतरिम सरकार की अनिश्चितताओं के बाद, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सत्ता में वापसी केवल एक सरकार का बदलना नहीं है; यह दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक पटल पर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

299 में से 212 सीटों पर बीएनपी की जीत और तारिक रहमान का प्रधानमंत्री पद की ओर बढ़ना यह स्पष्ट करता है कि बांग्लादेशी मतदाता अब ‘प्रयोग’ नहीं, बल्कि ‘स्थायित्व’ चाहता है।

छात्र आंदोलन से उपजी ‘नेशनल सिटीजन पार्टी’ का मात्र 6 सीटों पर सिमट जाना इस बात का प्रमाण है कि जनता भावनाओं के ज्वार से निकलकर हकीकत की जमीन पर फैसले ले रही है।

लोकतंत्र बनाम प्रतिशोध की चुनौती

बीएनपी और तारिक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करने की होगी कि यह जनादेश ‘बदले की राजनीति’ के लिए नहीं, बल्कि ‘बदलाव की राजनीति’ के लिए है।

बांग्लादेश का इतिहास खूनी संघर्षों और राजनीतिक प्रतिशोध से भरा रहा है। यदि नई सरकार अपनी ऊर्जा विरोधियों को निपटाने में लगाती है, तो 18 महीने के संघर्ष का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।

सबसे बड़ी परीक्षा सांप्रदायिक सौहार्द के मोर्चे पर है। बांग्लादेश की पहचान उसकी भाषाई और सांस्कृतिक बहुलता में है, न कि धार्मिक कट्टरता में।

अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं की सुरक्षा और सम्मान, नई सरकार की लोकतांत्रिक साख का लिटमस टेस्ट होगा।

यदि जीत के उन्माद में कट्टरपंथ को हवा दी गई, तो यह बांग्लादेश की उस ‘लिबरेशन स्पिरिट’ (1971) की हार होगी, जिसकी बुनियाद पर यह देश खड़ा है।

अर्थव्यवस्था की टूटी कड़ियों को जोड़ना

पिछले एक दशक में बांग्लादेश ने कपड़ा उद्योग और निर्यात में जो चमत्कारिक प्रगति की थी, वह राजनीतिक अस्थिरता की भेंट चढ़ चुकी है।

निवेशक डरे हुए हैं और महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ रही है। तारिक रहमान को समझना होगा कि राष्ट्रवाद के नारे पेट नहीं भर सकते।

आर्थिक सुधारों की गाड़ी को पटरी पर लाने के लिए उन्हें एक समावेशी और उदार नीति अपनानी होगी, जो दुनिया को यह संदेश दे सके कि बांग्लादेश अब ‘बिजनेस’ के लिए तैयार है, न कि ‘बवाल’ के लिए।

भारत के लिए कूटनीतिक धैर्य का समय

भारत के नजरिए से देखें तो नई दिल्ली को अब ‘प्रतिक्रिया’ (Reaction) नहीं, बल्कि ‘सधे हुए संवाद’ (Calibrated Engagement) की नीति अपनानी होगी।

यह सच है कि बीएनपी का अतीत भारत विरोधी बयानबाजी का रहा है और पाकिस्तान के साथ उनकी वैचारिक निकटता जगजाहिर है।

लेकिन, भूगोल को बदला नहीं जा सकता। भारत और बांग्लादेश साझा इतिहास, संस्कृति और 4096 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े हैं।

व्यापार, जल बंटवारा और सुरक्षा—ये ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें कोई भी सरकार नजरअंदाज नहीं कर सकती। भारत को चाहिए कि वह बांग्लादेश के जनादेश का सम्मान करे और तारिक रहमान सरकार के साथ ‘स्टेट-टू-स्टेट’ (राज्य स्तर पर) रिश्तों को मजबूती दे।

वहीं, नई ढाका सरकार को भी यह समझना होगा कि भारत की सुरक्षा चिंताओं (जैसे पूर्वोत्तर उग्रवाद या अवैध घुसपैठ) की अनदेखी कर वह अपने लिए भी स्थिर पड़ोसी का निर्माण नहीं कर सकती।

बांग्लादेश आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। यह चुनाव उसे कट्टरता के अंधेरे गर्त में भी धकेल सकता है और एक परिपक्व लोकतंत्र के रूप में भी स्थापित कर सकता है।

गेंद अब तारिक रहमान के पाले में है। क्या वह अतीत की कड़वाहटों को भुलाकर एक आधुनिक और समावेशी बांग्लादेश का निर्माण करेंगे?

यह सवाल न केवल बांग्लादेश के भविष्य के लिए, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की शांति के लिए महत्वपूर्ण है।

Santosh SETH

Recent Posts

ब्रिक्स बैठक: साझा मुद्रा का जिक्र नहीं, स्थानीय मुद्रा और UPI पर जोर

ब्रिक्स बैठक: साझा मुद्रा या 'डी-डॉलराइजेशन' का जिक्र नहीं, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और UPI…

4 hours ago

ब्रिक्स 2026: जिनपिंग का मध्य पूर्व में शांति का आह्वान, टैरिफ का विरोध

ब्रिक्स 2026: शी जिनपिंग का मध्य पूर्व में शांतिदूत बनने का आह्वान, मनमाने टैरिफ और…

4 hours ago

ब्रिक्स 2026: ईरान ने दी अमेरिका को चेतावनी, ट्रंप बोले- जल्द खत्म होगा युद्ध

ब्रिक्स समिट 2026: ईरान ने अमेरिका-इज़राइल को ललकारा, समुद्री जंग तेज और ट्रंप ने किया…

4 hours ago

ब्रिक्स 2026: भारत की सफल कूटनीति से इस्लामाबाद में सन्नाटा

ब्रिक्स 2026: नई दिल्ली में वैश्विक दिग्गजों का जमावड़ा, भारत की कूटनीतिक ताकत देख पाकिस्तान…

10 hours ago

ब्रिक्स 2026: पीएम मोदी का मंत्र, पिरामिड नहीं साझेदारी का मंच बने दुनिया

ब्रिक्स समिट 2026: 20वें वर्ष में BRICS, पीएम मोदी ने दिया 'विशेषाधिकार के पिरामिड' को…

11 hours ago

ब्रिक्स 2026: पीएम मोदी का 10-सूत्रीय रोडमैप, रूल-मेकर बने ग्लोबल साउथ

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: पीएम मोदी का 10-सूत्रीय रोडमैप, 'रूल-टेकर नहीं, रूल-मेकर बने ग्लोबल साउथ'…

11 hours ago