Indian Parliament building with graphics illustrating the Joint Parliamentary Committee (JPC) process for the FCRA Bill

FCRA बिल 2026 जेपीसी (JPC) के पास, जानें आगे क्या होगा?

FCRA बिल 2026 JPC के पास: क्या है जेपीसी, क्या होगी प्रक्रिया और सत्ता-विपक्ष के बीच क्यों छिड़ी है रार?

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

संसद के मॉनसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार जारी है। इस सत्र में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बने ‘विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ (FCRA) को लेकर सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।

विपक्ष के भारी हंगामे और आपत्तियों के बीच केंद्र सरकार ने इस बिल को विस्तृत समीक्षा के लिए संसद की संयुक्त समिति (JPC) के पास भेजने का फैसला किया है।

हालांकि, विपक्ष सरकार के इस कदम से भी संतुष्ट नहीं है और इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ बता रहा है। आइए समझते हैं कि जेपीसी क्या है, इसकी आगे की प्रक्रिया क्या होगी और इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान क्यों मचा है।

क्या है जेपीसी (JPC) और यह कैसे काम करती है?

संसद में दो प्रकार की समितियां होती हैं- स्थायी और तदर्थ (अस्थायी)। जेपीसी (Joint Parliamentary Committee) एक तदर्थ समिति है।

जिसे किसी विशेष विधेयक या मुद्दे की गहन जांच के लिए बनाया जाता है और काम पूरा होने के बाद इसे भंग कर दिया जाता है।

  • गठन और प्रक्रिया: किसी विधेयक पर गतिरोध होने पर जेपीसी के गठन का प्रस्ताव पास किया जाता है।
  • इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के सांसद शामिल होते हैं। लोकसभा अध्यक्ष इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति करते हैं।
  • समीक्षा का तरीका: समिति नियमित बैठकें करती है, दस्तावेज मंगाती है, विशेषज्ञों व सामाजिक संगठनों से सुझाव लेती है और जरूरत पड़ने पर किसी भी अधिकारी या संस्था को तलब कर सकती है।
  • अंतिम ड्राफ्ट: समीक्षा के बाद जरूरी संशोधन किए जाते हैं और सदस्यों की वोटिंग के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर संसद में पेश की जाती है। अमूमन इसके लिए 90 दिनों का समय मिलता है।

FCRA बिल पर JPC की रिपोर्ट कब तक आएगी?

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में इस बिल को जेपीसी के पास भेजने का प्रस्ताव पेश किया।

नियमों के अनुसार, इस समिति में कुल 31 सदस्य होंगे (लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य)।

इस समिति को संसद के शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक अपनी रिपोर्ट लोकसभा को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

सत्ता पक्ष और विपक्ष में तकरार बिल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है:

  • विपक्ष का विरोध: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि बिल को जेपीसी में भेजने के बजाय पूरी तरह वापस लिया जाना चाहिए।
  • उन्होंने कहा कि इस बिल का मकसद अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना है और कांग्रेस जेपीसी में इसका कड़ा विरोध करेगी।
  • सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताते हुए सवाल किया कि अन्य फंड्स को लेकर ऐसे नियम क्यों नहीं बनते?
  • सरकार का पलटवार: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “FCRA संशोधन विधेयक का एक भी प्रावधान अल्पसंख्यकों को निशाना नहीं बनाता है। विपक्ष भ्रम फैला रहा है।”
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ नहीं है, विदेशी फंड खर्च करने के लिए सख्त नियम और कानून होने ही चाहिए। सरकार ने इसे सीधे तौर पर देश की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया है।