The Government of India is integrating advanced technologies like AI, drones, and satellites to empower farmers and ensure real-time crop monitoring.
कृषि में क्रांति: एआई, ड्रोन और सैटेलाइट से हो रही हाई-टेक फसल निगरानी, जानें सरकार की योजनाएं”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारतीय कृषि अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर पूरी तरह से हाई-टेक और डिजिटल हो रही है। केंद्र सरकार सैटेलाइट, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए ‘प्रौद्योगिकी-आधारित फसल निगरानी प्रणाली’ को तेजी से लागू कर रही है।
लोकसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने सांसद दर्शन सिंह चौधरी के सवालों का जवाब देते हुए सरकार की इन तकनीकी पहलों का विस्तृत ब्यौरा दिया।
सरकार ‘फसल’ (FASAL) योजना के तहत मल्टीस्पेक्ट्रल और रडार सैटेलाइट डेटा का उपयोग करके 20 राज्यों की 11 प्रमुख फसलों के उत्पादन का पूर्वानुमान लगा रही है।
इसके साथ ही, ‘एग्री-डीएसएस’ (Agri-DSS) और राष्ट्रीय फसल आपदा निगरानी प्रणाली से सूखे और बाढ़ जैसी स्थितियों का सटीक आकलन किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दावों के त्वरित और पारदर्शी निपटान के लिए दो प्रमुख तकनीकी प्रणालियां लागू की गई हैं:
येस-टेक (YES-TECH): यह तकनीक 12 राज्यों में धान, गेहूं और सोयाबीन की उपज का सैटेलाइट आधारित सटीक आकलन कर रही है।
विंड्स (WINDS): इसके तहत 7 राज्यों में ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर मौसम स्टेशन (AWS) और वर्षामापी (ARG) का नेटवर्क बिछाया जा रहा है।
कृषि में ड्रोन के इस्तेमाल को भारी बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘एसएमएएम’ (SMAM) योजना के तहत किसानों को 40% से 50% तक की सब्सिडी पर ड्रोन दिए जा रहे हैं।
इसके तहत अब तक 2,122 ड्रोन बांटे जा चुके हैं। वहीं, ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को 1,094 ड्रोन वितरित किए गए हैं, जिन्हें डीजीसीए (DGCA) से मान्यता प्राप्त संस्थाओं द्वारा विशेष ट्रेनिंग दी गई है।
राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS): यह एआई आधारित ऐप किसानों को फसलों में लगे कीटों की फोटो खींचकर तुरंत समाधान पाने की सुविधा देता है। यह 73 फसलों के 436 कीटों को कवर करता है।
भारत विस्तार और किसान सारथी: एआई आधारित ‘भारत विस्तार’ ने अब तक 5.9 लाख किसानों को सेवा दी है और उनके 93 लाख सवालों के जवाब दिए हैं। वहीं, ‘किसान सारथी’ पोर्टल पर 2.97 करोड़ से अधिक किसान पंजीकृत हैं।
सरकार इन सभी तकनीकी पहलों को ‘डिजिटल कृषि मिशन’ और ‘एग्रीस्टैक’ के साथ जोड़ रही है। इससे पीएम-किसान का सीधा लाभ, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद, आपदा राहत और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन महज आधे घंटे के भीतर स्वीकृत करने जैसी सेवाएं पारदर्शी और तीव्र हो गई हैं।
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