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चुनाव आयोग की सफाई: ‘आंतरिक मतभेद सामान्य बात, सभी फैसले कानूनी’

‘आंतरिक मतभेद सामान्य प्रक्रिया, सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए’: विवादों के बीच चुनाव आयोग की बड़ी सफाई”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

‘वोटर लिस्ट संशोधन’ (SIR) और चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों को लेकर उठे राजनीतिक विवाद के बीच भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने बुधवार को अपना आधिकारिक बयान जारी किया है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट और विपक्ष के तीखे हमलों का संज्ञान लेते हुए आयोग ने स्पष्ट किया है कि एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था के भीतर विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना पूरी तरह से एक ‘सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया’ है।

आयोग ने दावों को खारिज करते हुए कहा कि 10 महीनों की अवधि के कुछ चुनिंदा आंतरिक नोट या टिप्पणियों को उजागर करना पूरी तस्वीर का केवल एक छोटा हिस्सा दिखाता है, जबकि सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से कानूनी प्रक्रियाओं के तहत लिए गए हैं।

चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के मुख्य बिंदु:

  • संविधान और पारदर्शिता: ECI ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 और ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023’ के सख्त नियमों के तहत काम करता है।

  • लिखित नोट, टिप्पणियां और आंतरिक ‘चेक एंड बैलेंस’ (Checks-and-balances) पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर चलने वाली प्रक्रियाएं हैं।

  • मतभेदों पर सफाई: ड्राफ्टिंग के दौरान कामकाज से जुड़े सवाल या सुझाव देना अंतिम फैसला लेने से पहले की प्रक्रिया का हिस्सा है।

  • इसका मुख्य उद्देश्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाना है। आयोग के हर अधिकारी को सुझाव देने का पूरा अधिकार है।

  • 40 नई पहलें और चुनाव: आयोग ने बताया कि पिछले एक साल में पूरे आयोग के सर्वसम्मत फैसलों के जरिए लगभग 40 नई पहलें शुरू की गई हैं।

  • हाल ही में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न कराए गए हैं।

  • डेटा सुरक्षा और ई-रोल: आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म (जैसे ECINet) सख्त साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल और ऑडिट कंट्रोल के तहत काम करते हैं।

  • मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का कार्य इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (EROs) और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEOs) अपनी कानूनी शक्तियों के अनुसार ही करते हैं।

चुनाव आयोग ने अपने बयान के अंत में यह दृढ़ता से दोहराया कि वह भारत के लोकतंत्र को आगे बढ़ाने और पूरी ईमानदारी के साथ अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।