सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की पहल 'एल्डरलाइन 14567' के तहत देश भर में 5.36 लाख से अधिक नागरिकों ने बुज़ुर्गों की देखभाल और गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिज्ञा ली है।
वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान के लिए 5.36 लाख लोगों ने ली प्रतिज्ञा, ‘एल्डरलाइन 14567’ बनी बुज़ुर्गों का बड़ा सहारा”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट
बुज़ुर्गों की देखभाल, सुरक्षा और समाज में उनकी गरिमा सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी अभियान के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
मंत्रालय के ‘एजिंग विद डिग्निटी’ (Aging with Dignity) अभियान के तहत अब तक देश भर में 5.36 लाख से अधिक नागरिकों ने बुज़ुर्गों के सम्मान और कल्याण के लिए ‘प्रतिज्ञा’ ली है।
इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए समर्पित राष्ट्रीय हेल्पलाइन ‘एल्डरलाइन’ (14567) भी उनके लिए एक बड़ी जीवनरेखा साबित हो रही है।
वरिष्ठ नागरिकों का जीवन भर ख्याल रखने और उन्हें प्रेम व सम्मान देने के उद्देश्य से ‘प्रतिज्ञा लें’ पहल की शुरुआत की गई है।
इस अभियान में 5.36 लाख से अधिक नागरिकों ने हिस्सा लेकर बुज़ुर्गों के प्रति अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारी को दोहराया है।
प्रतिज्ञा लेने वाले नागरिकों को मंत्रालय की ओर से एक ‘डिजिटल कमिटमेंट सर्टिफ़िकेट’ भी प्रदान किया जा रहा है।
इस प्रतिज्ञा का मुख्य उद्देश्य बुज़ुर्गों के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना, उनके साथ होने वाले दुर्व्यवहार का विरोध करना और एक ऐसा समावेशी समाज बनाना है जहां वरिष्ठ नागरिक बेखौफ और सम्मान के साथ जी सकें।
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने इस मौके पर कहा कि “वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान केवल एक सामाजिक ज़िम्मेदारी नहीं है,
बल्कि एक समावेशी और संवेदनशील भारत बनाने की दिशा में हमारी सामूहिक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता है।” उन्होंने देशवासियों से पोर्टल पर जाकर प्रतिज्ञा लेने की अपील भी की।
1 अक्टूबर 2021 को देश को समर्पित की गई ‘एल्डरलाइन’ (14567) एक टोल-फ्री, अखिल भारतीय हेल्पलाइन है।
यह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सप्ताह के सातों दिन सुबह 8:00 बजे से रात 8:00 बजे तक काम करती है। यह हेल्पलाइन ज़रूरतमंद बुज़ुर्गों के लिए एक ‘सिंगल-विंडो प्लेटफ़ॉर्म’ की तरह काम करती है।
मार्गदर्शन व जानकारी: स्वास्थ्य सुविधाओं, वृद्धाश्रमों, डे-केयर सेंटर और देखभाल करने वालों (Caregivers) की जानकारी उपलब्ध कराना।
परामर्श व कानूनी मदद: पेंशन से जुड़े मुद्दों, सरकारी योजनाओं, कानूनी मामलों और पारिवारिक विवादों को सुलझाने में सहायता।
भावनात्मक सहयोग: अकेलेपन, चिंता या तनाव से जूझ रहे बुज़ुर्गों को मानसिक और भावनात्मक सहारा देना।
रेस्क्यू ऑपरेशन: दुर्व्यवहार या अनदेखी के शिकार बुज़ुर्गों को बचाना और बेघर बुज़ुर्गों को उनके परिवार से वापस मिलाना।
सरकार की इन पहलों का उद्देश्य स्पष्ट है—देश के हर बुज़ुर्ग नागरिक को यह महसूस कराना कि समाज और सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़े हैं।
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