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हिमाचल प्रदेश में भूकंप: चंबा और कांगड़ा में एक घंटे में कई झटके

हिमाचल प्रदेश में भूकंप की दहशत: चंबा और कांगड़ा में एक घंटे के भीतर कई झटके, सहमकर घरों से भागे लोग”

शिमला/चंबा: द  पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

हिमाचल प्रदेश के चंबा और कांगड़ा जिलों में मंगलवार शाम लगातार आए भूकंप के झटकों ने लोगों में भारी दहशत फैला दी।

एक ही घंटे के भीतर महसूस किए गए इन झटकों के कारण लोग घबराकर एहतियातन अपने घरों से बाहर निकल आए।

राहत की बात यह रही कि इस प्राकृतिक आपदा में जान-माल के किसी नुकसान की खबर नहीं है। जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

भूकंप से जुड़े मुख्य आंकड़े (समय और तीव्रता)

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, झटकों का विवरण इस प्रकार है:

झटके का क्रम समय (मंगलवार शाम) प्रभावित क्षेत्र तीव्रता (रिक्टर स्केल) / गहराई
पहला झटका 6:54 बजे भरमौर (चंबा) 3.6 तीव्रता, 5 किमी गहराई
दूसरा झटका 7:40 बजे भरमौर (चंबा) जानकारी प्रतीक्षारत
तीसरा झटका 7:43 बजे भरमौर (चंबा) जानकारी प्रतीक्षारत
चौथा झटका पहले झटके के लगभग 45 मिनट बाद कांगड़ा मध्यम तीव्रता, 5 किमी गहराई

 

उथली गहराई के कारण अधिक महसूस हुए झटके

अधिकारियों ने बताया कि चंबा और कांगड़ा जिले ‘भूकंपीय क्षेत्र V’ (Seismic Zone V) में आते हैं, जिसे उच्च-क्षति-जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

इन झटकों की गहराई सतह से मात्र 5 किलोमीटर नीचे (उथली) होने के कारण कंपन काफी तेज महसूस हुआ।

झटके महसूस होते ही घरों में रखा सामान हिलने लगा, जिससे भरमौर क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और लोग काफी देर तक खुले आसमान के नीचे एक-दूसरे से जानकारी लेते रहे।

चंबा के एडीएम अमित मेहरा ने पुष्टि की है कि जिले में कोई हताहत या नुकसान नहीं हुआ है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: क्यों आता है भूकंप?

प्लेटों का टकराव: पृथ्वी के अंदर 7 प्रमुख टेक्टोनिक प्लेट्स हैं जो निरंतर घूमती रहती हैं। जब ये प्लेट्स किसी फॉल्ट लाइन (Fault Line) पर एक-दूसरे से अत्यधिक टकराती हैं, तो दबाव के कारण उनके कोने मुड़ने या टूटने लगते हैं। इससे उत्पन्न भूगर्भीय ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती है, जिससे सतह पर कंपन (भूकंप) होता है।

क्या होता है केंद्र और तीव्रता?

  • भूकंप का केंद्र (Epicenter): यह वह स्थान होता है जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से ऊर्जा निकलती है। यहाँ कंपन सर्वाधिक होता है और दूरी बढ़ने के साथ इसका प्रभाव कम होता जाता है।

  • तीव्रता का प्रभाव: यदि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7 या उससे अधिक हो, तो केंद्र के 40 किमी के दायरे में भारी तबाही हो सकती है।

  • हालांकि, नुकसान इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय तरंगों की दिशा (ऊपर की तरफ या क्षैतिज दायरे में) कैसी है।

Santosh SETH

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