दिल्ली और जम्मू-कश्मीर सहित उत्तर भारत में शनिवार शाम 6.2 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था।
दिल्ली-NCR से कश्मीर तक कांपी धरती: 6.2 तीव्रता के भूकंप से दहशत, घरों से भागे लोग, जानें भारत में भूकंप का कितना है खतरा?
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट
शनिवार की शाम उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से में दहशत का माहौल बन गया जब जम्मू-कश्मीर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली और NCR तक भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।
अचानक धरती हिलने से घबराए लोग अपने-अपने घरों और दफ्तरों से निकलकर खुले मैदानों की तरफ भागने लगे।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Center for Seismology) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार शाम 7 बजकर 4 मिनट पर यह भूकंप आया।
EQ of M: 6.2, On: 27/06/2026 19:04:51 IST, Lat: 36.442 N, Long: 70.672 E, Depth: 215 Km, Location: Afghanistan.
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रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.2 दर्ज की गई है। अधिकारियों ने बताया कि इस शक्तिशाली भूकंप का केंद्र पड़ोसी देश अफगानिस्तान में था और इसकी गहराई जमीन के 215 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई है।
अधिक गहराई होने के कारण इसके झटके उत्तर भारत के एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र में महसूस किए गए।
हाल के दिनों में दुनिया भर में भूकंप की घटनाओं में तेजी आई है। हाल ही में दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला (Venezuela) में आए दो विनाशकारी भूकंपों ने भारी तबाही मचाई है।
वहां मरने वालों की संख्या 920 के पार पहुंच गई है, जबकि 3,360 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है।
वेनेजुएला सरकार के अनुसार, मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है और युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
भूगर्भ विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का भौगोलिक ढांचा भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील है। देश के कुल भूभाग का लगभग 59 फीसदी हिस्सा भूकंप के खतरे की जद में है। वैज्ञानिकों ने भारत को 4 मुख्य भूकंप जोन (जोन-2, जोन-3, जोन-4 और जोन-5) में बांटा है:
जोन-5: यह सबसे ज्यादा संवेदनशील है, जहां विनाशकारी भूकंप का खतरा सबसे अधिक रहता है (जैसे पूर्वोत्तर भारत, कश्मीर का कुछ हिस्सा, कच्छ)।
जोन-4: हमारी राजधानी दिल्ली जोन-4 में आती है। यहां 7 से अधिक तीव्रता के भूकंप आ सकते हैं, जो भारी तबाही मचाने की क्षमता रखते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय टेक्टोनिक प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, जिसके कारण हिमालयी क्षेत्र और अन्य फॉल्ट लाइनों पर हमेशा बड़ा खतरा मंडराता रहता है।
भूकंप की तीव्रता मापने के लिए ‘रिक्टर स्केल’ (Richter Scale) का इस्तेमाल होता है:
4 से 4.9: घर में रखा हल्का सामान गिर सकता है।
5 से 5.9: भारी सामान और फर्नीचर अपनी जगह से हिलने लगता है।
6 से 6.9: इमारतों की नींव और बेस में दरारें आ सकती हैं।
7 से 7.9: इमारतें भरभरा कर गिर जाती हैं, भारी जानमाल का नुकसान होता है।
8 से 8.9: समुद्र के पास होने पर सुनामी का खतरा होता है और शहरों में भयंकर तबाही मचती है।
9 या उससे ज्यादा: यह सबसे प्रलयंकारी स्थिति होती है, जहां सब कुछ तबाह हो जाता है।
हमारी पृथ्वी के भीतर मुख्य रूप से 7 बड़ी टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) मौजूद हैं। ये प्लेट्स लगातार अपनी जगह पर धीरे-धीरे खिसकती और घूमती रहती हैं।
इस प्रक्रिया के दौरान जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं या रगड़ खाती हैं, तो भारी मात्रा में घर्षण और ऊर्जा उत्पन्न होती है।
यही ऊर्जा जब बाहर निकलने का रास्ता खोजती है, तो धरती की सतह हिलने लगती है, जिसे हम भूकंप कहते हैं।
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