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DRDO ने तोड़ दिया अमेरिका का गुरूर, चीन-रूस भी हैरान!

“भारत पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट तकनीक की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। उसने एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल कर ली है। यह तकनीक इतनी अहम है कि इससे पूरा फाइटर जेट तकनीक का कॉन्सेप्ट ही बदल जाएगा”

नई दिल्ली 10 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

अभी तक अमेरिका, यूरोप और चीन के पास ही ऐसी तकनीक होने की बात कही जा रही है। इस तकनीक के तहत फाइटर जेट्स अपने पंख तेजी से समेट या फिर उसे बढ़ा सकते हैं। 

यह बात सभी को पता है कि भारत लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रहा है। उसके पास मौजूदा समय में स्क्वाड्रन की संख्या 42 से घटकर 30 पर आ गई है। लेकिन, सबसे बड़ी चुनौती नए फाइटर जेट्स हासिल करने की है।

दरअसल, फाइटर जेट्स कोई वाशिंग मशीन या रेफ्रिजरेटर नहीं होते हैं कि कोई व्यक्ति मार्केट गया और उसे खरीदकर लेते आया। बल्कि, ये बेहद जटिल तकनीक वाले विमान हैं और भारत की कोशिश है कि वह अब भविष्य में स्वदेशी फाइटर जेट्स का इस्तेमाल करे।

इस दिशा में भारत अपने तेजस प्रोग्राम के साथ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA यानी एम्का प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। अब इस एम्का प्रोजेक्ट में देसी वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है।

दरअसल, डीआरडीओ ने मॉर्फिंग विंग टेक्नोलॉजी का सफल परीक्षण किया है. यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो दुनिया के कुछ चुनिंदा कंपनियों जैसे एयरबस और नासा के पास है।

एक तरह से इस तकनीक पर अमेरिका और यूरोप का कब्जा है। चीन और रूस जैसे देश भी पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट्स बना चुके हैं लेकिन, उनके पास भी ऐसी सटीक तकनीक होने को लेकर सवाल किए जाते हैं। 

⚙️ 1. मुख्य तकनीक: शेप मेमोरी अलॉय (SMA)

यह सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी खुलासा है। मॉर्फिंग विंग्स के लिए SMA का उपयोग किया गया है, जिसकी कार्यप्रणाली इस प्रकार है:

पहलू

विवरण

तकनीकी लाभ

सामग्री

पंख एक खास धातु (शेप मेमोरी अलॉय) से बने होते हैं।

ये मिश्र धातुएँ एक विशेष तापमान पर गर्म होने पर अपने पूर्व-निर्धारित आकार में वापस आती हैं (या फैल जाती हैं) और ठंडा होने पर सिकुड़ जाती हैं।

प्रक्रिया की गति

यह गर्म या ठंडा होने की पूरी प्रक्रिया सेकंडों में पूरी होती है।

0.17 सेकंड में पूरा आकार परिवर्तन (Shape Change) करने की अविश्वसनीय गति, जो फाइटर जेट की डॉगफाइट और त्वरित पैंतरेबाज़ी के लिए आवश्यक है।

आकार परिवर्तन दर

पंखे प्रति सेकंड 35 डिग्री की रफ्तार से अपना आकार बदलते हैं।

यह अत्यधिक उच्च दर विमान को उड़ान के विभिन्न चरणों (टेकऑफ, क्रूज़, डॉगफाइट) में तुरंत वायुगतिकीय लाभ प्राप्त करने की अनुमति देती है।

डिज़ाइन

इसमें पारंपरिक पंखों की तरह कोई कट या जोड़ नहीं होते।

यह विमान की गुप्तता (Stealth) को बढ़ाता है, क्योंकि कट और जोड़ रडार सिग्नल को प्रतिबिंबित करते हैं।

⚡ 2. ऊर्जा खपत की चुनौती का समाधान

मॉर्फिंग विंग्स की सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा की खपत थी, क्योंकि SMA को गर्म/ठंडा करने के लिए काफी शक्ति की आवश्यकता होती है।

  • चुनौती: पंखों को गर्म या ठंडा करने में बहुत अधिक ऊर्जा की खपत होती थी, जिससे विमान पर बोझ बढ़ता था।

  • DRDO का समाधान: वैज्ञानिकों ने एक एडाप्टिव पावर अलोकेशन एल्गोरिदम (Adaptive Power Allocation Algorithm) विकसित किया है।

  • परिणाम:

    • यह एल्गोरिदम ज़रूरत के हिसाब से बिजली को बुद्धिमानी (Intelligently) से वितरित करता है।

    • केवल विमान के सक्रिय सेगमेंट (Active Segment) को ही पावर मिलती है।

    • सफल परीक्षण में, केवल 5.6% अतिरिक्त ऊर्जा की खपत हुई। यह एक बड़ी सफलता है, क्योंकि यह तकनीक को एक फाइटर जेट पर लागू करने के लिए व्यावहारिक और कुशल बनाता है।

🎯 3. AMCA और मानवरहित विमानों पर सीधा प्रभाव

इस तकनीक का सफल विकास भारत के एयरोस्पेस कार्यक्रम के लिए बहुआयामी लाभ प्रदान करता है:

  1. AMCA प्रोजेक्ट: यह AMCA को वैश्विक स्तर के 5वीं पीढ़ी के मानकों से ऊपर ले जाता है, खासकर सुपर-स्टील्थ और उच्च पैंतरेबाज़ी की क्षमताओं के मामले में।

  2. मानव रहित विमान (UAVs): इस तकनीक का इस्तेमाल मानव रहित विमानों के विकास में भी किया जाएगा, जिससे उनकी रेंज, पेलोड क्षमता और मिशन दक्षता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

🔬 शेप मेमोरी अलॉय (SMA) के विशिष्ट गुण

SMA ऐसे धातु मिश्र धातु (metallic alloys) होते हैं जिनमें दो अनूठी क्षमताएँ होती हैं:

  1. शेप मेमोरी इफ़ेक्ट (SME): विरूपण (deform) के बाद भी विशिष्ट तापमान पर अपने मूल आकार में वापस आ जाना।

  2. सुपर-इलास्टिसिटी (Super-elasticity): बिना स्थायी क्षति (plastic deformation) के अत्यधिक खिंचाव (strain) को झेलने की क्षमता।

1. फेज़ ट्रांज़िशन और क्रियान्वयन (Actuation)

SMA का जादू उसकी क्रिस्टल संरचना के तापमान-आधारित परिवर्तन में निहित है:

  • कम तापमान फेज़ (Martensite): यह नरम, अधिक लचीली (flexible), और आसानी से विकृत होने वाली क्रिस्टल संरचना है। इस फेज़ में पंख को मोड़ा या बदला जा सकता है।

  • उच्च तापमान फेज़ (Austenite): यह कठोर, अधिक मजबूत क्रिस्टल संरचना है। जब पंख को एक विशिष्ट संक्रमण तापमान (Transition Temperature) से ऊपर गर्म किया जाता है, तो यह तुरंत मार्टेन्साइट से ऑस्टेनाइट में बदल जाता है और अपने “याद किए गए” मूल आकार (Pre-determined shape) में वापस आ जाता है।

कार्यप्रणाली:

  • DRDO इस परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए विद्युत प्रवाह (Electrical Current) का उपयोग करता है।

  • बिजली से SMA को गर्म किया जाता है, जिससे यह ऑस्टेनाइट में बदलकर सिकुड़ता है/फैलता है। बिजली बंद होने पर यह ठंडा होकर मार्टेन्साइट में वापस आता है।

  • इस प्रक्रिया में पारंपरिक हाइड्रोलिक या इलेक्ट्रोमैकेनिकल एक्चुएटर्स की आवश्यकता नहीं होती।

2. गति और प्रतिक्रिया (Speed and Responsiveness)

मॉर्फिंग विंग्स को किसी फाइटर जेट में इस्तेमाल करने के लिए उनकी गति ही सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है:

विशिष्टता (Specification)

DRDO का प्रदर्शन

महत्व (Significance)

आकार परिवर्तन की गति

0.17 सेकंड में तटस्थ (Neutral) आकार से अधिकतम झुकाव (Maximum Droop) तक पहुँच जाता है।

यह लगभग तात्कालिक प्रतिक्रिया है, जो विमान को डॉगफाइट या त्वरित वायुगतिकीय सुधार (Aerodynamic Correction) के लिए आवश्यक है।

परिवर्तन की दर

35 डिग्री प्रति सेकंड की दर से आकार बदलता है।

यह उच्च दर सुनिश्चित करती है कि विमान उड़ान की बदलती स्थितियों (जैसे वायुप्रवाह) के अनुसार गतिशील रूप से (Dynamically) अनुकूलन कर सकता है।

एक्ट्यूएटर का प्रकार

SMA (शेप मेमोरी अलॉय), जो निकेल-टाइटैनियम (Nitinol) जैसे मिश्र धातु हो सकते हैं।

पारंपरिक भारी और जटिल घटकों की जगह लेता है, जिससे पंख हल्का (Lightweight) और सरल बन जाता है।

3. रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) में कमी के लिए गुण

यह SMA की सबसे बड़ी विशिष्टता है जो 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट के लिए निर्णायक है:

  • जोड़/कट का अभाव: SMA आधारित मॉर्फिंग विंग्स में पारंपरिक फ्लैप्स (Flaps), स्लैट्स (Slats) या एलरोन (Ailerons) की तरह दृश्यमान जोड़ (Visible Joints) या हिंग (Hinges) नहीं होते हैं।

  • सतह की निरंतरता (Continuous Surface): पंख की बाहरी त्वचा (Skin) हमेशा चिकनी और निर्बाध (Seamless) बनी रहती है।

  • स्टील्थ लाभ: रडार सिग्नल धातु के तीखे किनारों, कोनों और जोड़ों से परावर्तित (Reflected) होते हैं। चिकनी सतह रडार सिग्नल को बिखेर देती है या अवशोषित कर लेती है, जिससे विमान का RCS (रडार क्रॉस-सेक्शन) कम हो जाता है, और यह अत्यधिक स्टील्थ बन जाता है।

4. DRDO का पावर एल्गोरिदम (Adaptation)

जैसा कि आपने उल्लेख किया, DRDO की सबसे बड़ी सफलता एडाप्टिव पावर अलोकेशन एल्गोरिदम है:

  • समस्या: SMA को नियंत्रित करने के लिए अत्यधिक ऊर्जा (बिजली) की आवश्यकता होती है।

  • समाधान: एल्गोरिदम केवल पंख के सक्रिय सेगमेंट (Active Segment) को ही बिजली प्रदान करता है।

  • परिणाम: इस बुद्धिमान प्रबंधन के कारण, पूरे सिस्टम के संचालन में केवल 5.6% अतिरिक्त ऊर्जा की खपत हुई, जिससे यह फाइटर जेट के लिए एक व्यावहारिक तकनीक बन गई।

यह तकनीक भारत को केवल 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों तक ही सीमित नहीं रखेगी, बल्कि 6वीं पीढ़ी की तकनीकों जैसे मिशन-एडाप्टिव विंग्स और उन्नत मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहनों (UCAVs) के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।

यह तकनीकी प्रगति दर्शाती है कि भारत जटिल और अत्याधुनिक विमानन प्रौद्योगिकियों में आत्म-निर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

Santosh SETH

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