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सुप्रीम कोर्ट के आदेश में फर्जीवाड़ा कर कैदी को रिहा करने वाले DIG गिरफ्तार

बेंगलुरु जेल कांड: सुप्रीम कोर्ट के आदेश में फर्जीवाड़ा कर कैदी को रिहा करने के आरोप में DIG सोमशेखर अरेस्ट, यौन शोषण का भी आरोप”

बेंगलुरु: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

कर्नाटक के जेल विभाग में एक बेहद हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश में हेरफेर कर उम्रकैद की सजा काट रहे एक कैदी को रिहा करने के गंभीर आरोप में बेंगलुरु सेंट्रल जेल (परप्पना अग्रहारा) के पूर्व चीफ सुपरिटेंडेंट और वर्तमान में डीआईजी प्रिजन्स (DIG Prisons) के पद पर तैनात एम. सोमशेखर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

इस मामले में कैदी की पत्नी की ओर से डीआईजी पर ‘यौन शोषण’ (Sexual Favor) के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

क्या है फर्जी रिहाई का पूरा मामला?

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब इसी साल 20 मई को बेंगलुरु सेंट्रल जेल के वर्तमान सुपरिटेंडेंट (प्रभारी) ने परप्पना अग्रहारा पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के अनुसार, चिकपेट पुलिस स्टेशन में दर्ज एक आपराधिक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 12 जुलाई 2004 को शंकर ए. नामक कैदी को उम्रकैद और ₹10,000 जुर्माने की सजा सुनाई थी।

शंकर ने इस फैसले को कर्नाटक हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन दोनों ही अदालतों ने उसकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।

इसके बावजूद, 13 नवंबर 2018 को शंकर ए. को सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया।

क्लर्क ने बनाया सुप्रीम कोर्ट का फर्जी आदेश

पुलिस की जांच में सामने आया कि उस समय जेल के कैदी सेक्शन में सेकंड डिवीजन असिस्टेंट (SDA) के तौर पर काम करने वाले क्लर्क श्रीकांत एस. (जो अब FDA हैं) ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की नकली कॉपी (Forged Document) तैयार की थी।

इस फर्जी आदेश में यह दिखाया गया था कि 2 नवंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने शंकर की रिहाई का आदेश पारित कर दिया है।

इसी जाली दस्तावेज के आधार पर तत्कालीन चीफ सुपरिटेंडेंट (वर्तमान DIG सोमशेखर) ने कैदी को जेल से आजाद कर दिया था।

कैदी की पत्नी का गंभीर आरोप: ‘रिहाई के बदले लिया सेक्सुअल फेवर’

मामले की जांच के दौरान जब पुलिस ने रिहा हुए कैदी शंकर की पत्नी से पूछताछ की, तो एक और डरावना सच सामने आया।

पत्नी ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया कि तत्कालीन चीफ सुपरिटेंडेंट (सोमशेखर) ने उसके पति को जेल से अवैध रूप से रिहा कराने में पूरी मदद की थी,

और इसके एवज में अधिकारी ने उसका ‘यौन शोषण’ (Sexual Favor) किया था। पुलिस वर्तमान में इस संगीन आरोप की भी गहनता से जांच कर रही है।

DIG सोमशेखर ने छिपाई जानकारी, भेजे गए रिमांड पर

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने पाया कि वर्तमान DIG सोमशेखर न केवल जांच में सहयोग करने में नाकाम रहे, बल्कि उन्होंने इस गंभीर मामले से जुड़ी कई अहम जानकारियां भी छिपाईं।

सबूतों को नष्ट करने और साजिश में शामिल होने के आरोप में पुलिस ने 4 अक्टूबर 2026 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

अदालत में पेश करने के बाद कोर्ट ने आगे की पूछताछ के लिए उन्हें 9 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत (Police Remand) में भेज दिया है। इस मामले में क्लर्क सहित दो अन्य आरोपियों को भी न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।

बेंगलुरु जेल कांड: सुप्रीम कोर्ट के आदेश में फर्जीवाड़ा और गिरफ्तारी

विवरण / पहलू महत्वपूर्ण जानकारी
गिरफ्तार अधिकारी एम. सोमशेखर (वर्तमान DIG प्रिजन्स, पूर्व चीफ सुपरिटेंडेंट)
रिहा किया गया कैदी शंकर ए. (उम्रकैद का सजायाफ्ता)
जेल का नाम बेंगलुरु सेंट्रल जेल (परप्पना अग्रहारा)
फर्जीवाड़ा (Forgery) सुप्रीम कोर्ट के रिहाई आदेश की जाली कॉपी बनाई गई।
कैदी की रिहाई की तारीख 13 नवंबर 2018
पत्नी का गंभीर आरोप तत्कालीन सुपरिटेंडेंट (DIG) ने रिहाई के बदले ‘यौन शोषण’ किया।
पुलिस की कार्रवाई 4 अक्टूबर 2026 को DIG सोमशेखर गिरफ्तार (9 अक्टूबर तक रिमांड)।
अन्य आरोपी क्लर्क श्रीकांत एस. (SDA/FDA) जिसने जाली आदेश बनाया था।