DELHI/NCR

दिल्ली : CM ने किया आधुनिक देसी एयर प्यूरीफायर का निरीक्षण

राजधानी में प्रदूषण पर ‘देसी तकनीक’ का प्रहार: CM ने किया अत्याधुनिक एयर प्यूरीफायर का निरीक्षण, अब सालभर चलेगा अभियान” 

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट 

राजधानी की सड़कों पर हवा में फैले धुएं, धूल और जहरीले कणों से निजात दिलाने के लिए अब स्वदेशी (देसी) तकनीक का बड़ा सहारा लिया जा रहा है।

शनिवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में स्थापित किए गए तीन आधुनिक ‘एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम’ का ग्राउंड जीरो पर जाकर निरीक्षण किया।

इस दौरान उनके साथ पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी मौजूद रहे। निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब राजधानी में प्रदूषण के खिलाफ सरकार केवल सर्दियों में नहीं, बल्कि पूरे साल ‘मिशन मोड’ में काम करेगी।

रामा रोड पर लगे 21 फिल्टर रहित एयर प्यूरीफायर

मुख्यमंत्री ने रामा रोड स्थित सत गुरु राम सिंह मार्ग पर लगाए गए अत्याधुनिक ‘एसटीआर-101’ (STR-101) फिल्टर रहित एयर प्यूरीफायर सिस्टम का बारीकी से मुआयना किया।

प्रदूषण से निपटने के लिए सड़क के बीचों-बीच बिजली के खंभों पर इस डिवाइस की 21 यूनिट्स लगाई गई हैं।

यह खास देसी सिस्टम हवा में मौजूद खतरनाक पीएम 1 (PM 1), पीएम 2.5 (PM 2.5) और पीएम 10 (PM 10) के अलावा धूल, धुआं और कार्बन के बारीक कणों को पूरी तरह खत्म करने के लिए डिजाइन किया गया है।

बैक्टीरिया और वायरस भी होंगे निष्क्रिय, प्रति घंटे 3 लाख लीटर हवा होगी साफ

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को तकनीक की जानकारी देते हुए बताया कि इस डिवाइस में लगी ‘हाई-फ्रीक्वेंसी चिप’ तकनीक इतनी उन्नत है कि यह हवा में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस को भी निष्क्रिय करने में सक्षम है।

इस प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह प्रति घंटे करीब तीन लाख लीटर हवा को प्रोसेस (साफ) कर सकती है और इसमें किसी भी पारंपरिक फिल्टर को बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।

यह पूरी तरह से ‘ऑटो-क्लीनिंग’ (स्वतः सफाई) और बेहद कम रखरखाव वाली तकनीक है। सिस्टम के संचालन और वायु गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए इसमें ‘आईओटी’ (IoT – Internet of Things) आधारित लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाया गया है।

‘सर्दियों तक सीमित नहीं रहेगी लड़ाई’

इस मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ हमारी लड़ाई का अभियान अब केवल सर्दियों के मौसम तक सीमित नहीं रहेगा।

सरकार अब पूरे साल तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन (नवाचार) के जरिए इसके स्थायी समाधान पर काम करेगी।

उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) के तहत विकसित की जा रही स्वदेशी तकनीकें पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही हैं और सरकार ऐसी कारगर तकनीकों को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

Santosh SETH

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