देहरादून IMA: राष्ट्रपति मुर्मु ने पासिंग आउट परेड की ली सलामी
🪖 देहरादून IMA में राष्ट्रपति मुर्मु ने ली पासिंग आउट परेड की सलामी: महिला कैडेटों को देखकर जताई खुशी, बोलीं- ‘आप ही 140 करोड़ भारतीयों के रक्षक हैं’
देहरादून: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ
भारत की राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर श्रीमती द्रौपदी मुर्मु (Droupadi Murmu) ने शनिवार, 13 जून 2026 को देहरादून स्थित प्रतिष्ठित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में 158वें नियमित पाठ्यक्रम और 141वें तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम की ‘पासिंग आउट परेड’ (Passing Out Parade) का निरीक्षण किया। इस भव्य समारोह के दौरान युवा सैन्य अधिकारियों ने देश सेवा की शपथ ली।
‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए जानते हैं राष्ट्रपति के संबोधन की मुख्य बातें और युवा अधिकारियों को दिया गया उनका संदेश:
🌟 ‘कठिन ट्रेनिंग, साहस और बुद्धिमत्ता बनेगी ताकत’
राष्ट्रपति मुर्मु ने देश के सबसे कठिन सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा करने पर सभी अधिकारी कैडेटों को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि रणभूमि में सिर्फ हथियार ही नहीं, बल्कि एक सैन्य अधिकारी का साहस और उसकी बुद्धिमत्ता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है।
👩✈️ महिला कैडेट्स को देखकर गदगद हुईं राष्ट्रपति
परेड के दौरान नौ महिला कैडेटों को कदमताल करते देख राष्ट्रपति मुर्मु को अत्यंत प्रसन्नता हुई।
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इतिहास का अहम पल: उन्होंने कहा कि यह आईएमए के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण है। यह न केवल भारत के रक्षा बलों की एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ की दिशा में भारत की प्रगति का एक बेहद प्रेरणादायक उदाहरण भी है।
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उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में और भी कई महिला कैडेट अकादमी में शामिल होकर देश का नाम रोशन करेंगी।
🤝 विदेशी कैडेटों को दिया सहयोग और शांति का संदेश
परेड में कई मित्र देशों के कैडेट भी शामिल थे। राष्ट्रपति ने उन्हें भी शुभकामनाएं दीं।
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उन्होंने कहा कि विदेशी कैडेटों की यहां उपस्थिति दुनिया भर के देशों के साथ मित्रता, सहयोग और शांतिपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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इस संस्थान से कैडेट्स जो आपसी विश्वास और समझ लेकर जाएंगे, वह राष्ट्रों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
🛡️ युवा अधिकारियों को मंत्र: ‘आप 140 करोड़ नागरिकों का विश्वास हैं’
राष्ट्रपति मुर्मु ने पास आउट होने वाले युवा सैन्य अधिकारियों को उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का अहसास कराया।
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देश के रक्षक: उन्होंने कहा कि युवा अधिकारी हमारे राष्ट्र की संप्रभुता, एकता और अखंडता के रक्षक हैं। उन पर 140 करोड़ से अधिक नागरिकों का अडिग विश्वास टिका है।
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तेजी से बदलती चुनौतियां: उन्होंने याद दिलाया कि ‘सेवा ही सर्वोच्च कर्तव्य है’। तेजी से बदलती सुरक्षा चुनौतियों और तकनीकी प्रगति के इस युग में भारतीय सेना को भविष्य के लिए हमेशा तैयार और अनुकूलनशील रहना होगा।
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सैनिकों की देखभाल: सेना अधिकारी के रूप में उन्हें न सिर्फ नेतृत्व करना है, बल्कि अपने सैनिकों की देखभाल भी करनी है।
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टीम वर्क, समर्पण और सैनिकों की भलाई सुनिश्चित करके ही वे अपने नेतृत्व वाली इकाइयों की युद्ध क्षमता को मजबूत कर सकेंगे।
नोट: भारतीय सशस्त्र बलों के गौरवशाली इतिहास, सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।











