कचगांव चेयरमैन पर गबन का आरोप, सभासदों को मिली धमकी | The Politics Again

जौनपुर: कचगांव नगर पंचायत में ‘घोटाले’ का सवाल पूछने पर मिली मौत की धमकी; सभासदों का विद्रोह, चेयरमैन फिरोज खान और भाई पर गंभीर आरोप

“जिले की कचगांव नगर पंचायत (Kachgaon Nagar Panchayat) में भ्रष्टाचार और गुंडाराज का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है”

जौनपुर “The Politics Again” संतोष सेठ की रिपोर्ट 

यहां के निर्वाचित सभासदों ने अपने ही अध्यक्ष फिरोज खान और उनके भाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

सभासदों का आरोप है कि नगर पंचायत में ‘फर्जी कर्मचारियों’ के नाम पर लाखों का गबन हो रहा है, और जब उन्होंने इसका हिसाब मांगा, तो उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गईं।

डरे-सहमे सभासदों ने जिलाधिकारी (DM) और एसपी (SP) को प्रार्थना पत्र देकर सुरक्षा और जांच की गुहार लगाई है।

‘फर्जी कर्मचारियों’ का खेल

सभासद आकाश सिंह ने पूरे मामले का पर्दाफाश करते हुए बताया कि उन्होंने कई बार अधिशासी अधिकारी (EO) से स्थायी, संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की प्रमाणित सूची मांगी, लेकिन जानबूझकर सूची नहीं दी जा रही है।

  • आरोप: सभासदों को आशंका है कि मस्टर रोल (हाजिरी रजिस्टर) में ऐसे लोगों के नाम हैं जो कभी काम पर आते ही नहीं, और उनके नाम पर सरकारी पैसा निकाला जा रहा है।

  • नियम: सूचना का अधिकार (RTI) और सरकारी पारदर्शिता के तहत कर्मचारियों का ब्यौरा सार्वजनिक होना चाहिए, जिसे छिपाना ‘प्रशासनिक कदाचार’ है।

गुंडाराज: “हिसाब मांगोगे तो मारे जाओगे”

शिकायत में सबसे गंभीर आरोप अध्यक्ष के भाई परवेज खान पर लगे हैं। सभासदों (अखिलेश यादव, सूरज कुमार, सुनील विश्वकर्मा, अरविंद प्रजापति, इकबाल अंसारी और रवींद्र यादव) का कहना है कि नगर पंचायत में तानाशाही चल रही है।

  • उनका आरोप है: “जब भी हम पारदर्शिता की बात करते हैं, चेयरमैन के इशारे पर उनके भाई और गुर्गे हमें गालियां देते हैं और जान से मारने की धमकी देते हैं।”

सभासदों की मांग: ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’ हो

विद्रोही सभासदों ने डीएम से दो टूक मांग की है:

  1. कर्मचारियों की पूरी सूची (नाम, पिता का नाम, मोबाइल नंबर, बैंक खाता) तुरंत सार्वजनिक हो।
  2. एक स्वतंत्र मजिस्ट्रेट द्वारा सभी कर्मचारियों का ‘भौतिक सत्यापन’ (Physical Verification) कराया जाए।
  3. अगर गबन मिले, तो चेयरमैन और अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज हो।

“The Politics Again” विश्लेषण 

कचगांव में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का यह विद्रोह बताता है कि ‘सिस्टम’ में सब कुछ ठीक नहीं है।

अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में है कि वे इस ‘घोटाले’ की जांच कराते हैं या मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।