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दतिया उपचुनाव: नरोत्तम मिश्रा का कटा टिकट, आशुतोष तिवारी पर दांव

दतिया उपचुनाव: कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का कटा टिकट, BJP ने नए चेहरे आशुतोष तिवारी पर खेला दांव; जानें क्या है रणनीति”

दतिया/भोपाल: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है।

पार्टी ने प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और शिवराज सरकार में सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में शुमार रहे डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटते हुए आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है।

हाल ही में जनता से माफी मांगकर राजनीतिक वापसी की कोशिश कर रहे मिश्रा का टिकट कटना प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

मिश्रा ने उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र भी खरीदा था, लेकिन इसके बावजूद पार्टी ने एक नए चेहरे पर भरोसा जताया है।

आइए समझते हैं भाजपा के इस बड़े फैसले के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी और राजनीतिक समीकरण:

पुराने चेहरे की जगह नए नेतृत्व को मौका

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा दतिया में लंबे समय से एक ही चेहरे पर निर्भर रहने की रणनीति अब बदल रही है।

  • डॉ. नरोत्तम मिश्रा 2008, 2013 और 2018 में लगातार चुनाव जीतकर मंत्री बने थे।

  • लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती से करारी हार का सामना करना पड़ा।

  • माना जा रहा है कि इस हार के बाद पार्टी ने स्थानीय नेतृत्व और चुनावी रणनीति की नए सिरे से समीक्षा की है।

  • भाजपा अब कई क्षेत्रों में पुरानी पीढ़ी की जगह नए नेतृत्व को स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है और आशुतोष तिवारी को टिकट देना इसी रणनीति का हिस्सा है।

स्थानीय स्तर पर नाराजगी और विजयपुर हार का डर

सूत्रों की मानें तो 2023 की हार ने पार्टी को उम्मीदवार चयन पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर किया। लंबे समय तक एक ही चेहरे के साथ चुनाव लड़ने से क्षेत्र में गहरी ‘एंटी-इनकम्बेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर) पैदा हो गई थी।

जनता के साथ-साथ स्थानीय संगठन में भी नरोत्तम मिश्रा को लेकर नाराजगी की बातें सामने आई थीं।

हाल ही में विजयपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भाजपा पूरी तरह सतर्क है। पार्टी अब ऐसा कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहती जिससे जनता के बीच कोई नकारात्मक संदेश जाए।

कौन हैं आशुतोष तिवारी? (संगठन के चेहरे पर भरोसा)

आशुतोष तिवारी को टिकट मिलने के पीछे उनकी मजबूत संगठनात्मक पृष्ठभूमि मुख्य कारण है:

  • वे लंबे समय तक भाजपा संगठन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं।

  • शिवराज सरकार के दौरान वे ग्वालियर क्षेत्र के संगठन मंत्री और मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं।

  • वे मूल रूप से दतिया जिले के भांडेर क्षेत्र से आते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ है।

सध गया ब्राह्मण वोट बैंक

टिकट वितरण में भाजपा ने जातीय समीकरणों का भी पूरा ध्यान रखा है। दतिया में नरोत्तम मिश्रा के स्थान पर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने कोई बड़ा जातीय बदलाव नहीं किया है।

दोनों ही नेता ब्राह्मण समाज से आते हैं। विश्लेषकों के अनुसार, नया चेहरा देने के साथ-साथ पार्टी ने ब्राह्मण वोट बैंक को अपने पाले में बनाए रखने का सुरक्षित दांव चला है।

भाजपा के सामने चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुईं

राजनितिक जानकारों का मानना है कि आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने ब्राह्मण वोट बैंक तो साध लिया, लेकिन चुनौतियां कम नहीं हैं।

दतिया में डॉ. नरोत्तम मिश्रा का वर्षों का मजबूत राजनीतिक और संगठनात्मक नेटवर्क है। बूथ स्तर तक उनके समर्थक फैले हुए हैं।

ऐसे में उस पूरे नेटवर्क को नए उम्मीदवार के पक्ष में सक्रिय करना और गुटबाजी से बचना भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

अब क्या होगा नरोत्तम मिश्रा का भविष्य?

इस घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक भविष्य क्या होगा?

राजनितिक विश्लेषको के अनुसार, भाजपा उम्मीदवारों का चयन व्यापक फीडबैक और आंतरिक सर्वे के आधार पर करती है।

यदि मिश्रा को टिकट नहीं मिला है, तो केंद्रीय नेतृत्व (जिससे उनकी अच्छी करीबी है) ने उनके लिए कोई और भूमिका तय कर रखी होगी।

फिलहाल उन्हें उपचुनावों में ‘स्टार प्रचारक’ की जिम्मेदारी दी जा सकती है। भविष्य में उन्हें प्रदेश या राष्ट्रीय संगठन में कोई अहम पद, या फिर किसी अन्य रूप में सत्ता और संगठन में महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा जा सकता है।

Santosh SETH

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