डोडा जिले के भलेसा इलाके में बादल फटने से अचानक आई बाढ़ और मलबे के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और कई गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह से टूट गया है।
जम्मू-कश्मीर के डोडा में कुदरत का कहर: बादल फटने और भारी बारिश से मची भारी तबाही, कई गांवों का संपर्क टूटा”
डोडा: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में मौसम ने अचानक भयानक रूप ले लिया है। जिले में लगातार हो रही भारी बारिश और बादल फटने (Cloudburst) की डरावनी घटनाओं से जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
इस प्राकृतिक आपदा ने इलाके में व्यापक स्तर पर तबाही मचाई है, जिससे किसानों की फसलों, बाग-बगीचों और लोगों की निजी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं।
जिले के सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में भलेसा का खलजुगासर इलाका शामिल है, जहां एक के बाद एक दो बार बादल फटने की घटना सामने आई।
बादल फटने से अचानक आई भीषण बाढ़ ने कृषि भूमि को अपनी चपेट में ले लिया। इसके परिणामस्वरूप किसानों की खून-पसीने से तैयार खड़ी फसलें और फलदार बाग-बगीचे चंद मिनटों में बर्बाद हो गए।
इसके साथ ही बाढ़ के पानी और मलबे से कई रिहायशी मकानों और अन्य निजी संपत्तियों को भी भारी क्षति पहुंची है।
लगातार भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ के साथ पहाड़ों से भारी मात्रा में मलबा, बड़े पत्थर और उखड़े हुए पेड़ बहकर मुख्य सड़कों पर आ गिरे।
आवाजाही ठप: मलबे के कारण भलेसा पट्टी के कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय और शेष क्षेत्रों से पूरी तरह कट गया है। भलेसा का भट्यास इलाका घंटों तक बाकी हिस्सों से कटा रहा।
आपूर्ति का संकट: सड़कों के बंद होने से प्रभावित गांवों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होने का गंभीर संकट पैदा हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कश्तीगढ़ क्षेत्र में भी मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए, हालांकि राहत की बात यह है कि वहां से किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।
अधिकारियों के मुताबिक, बादल फटने से क्षेत्र के कई जल स्रोत अचानक उफान पर आ गए, जिससे निचले इलाकों में जलभराव हो गया और मिट्टी का भारी कटाव हुआ।
भूस्खलन के चलते कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह से धंस गई हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवरुद्ध सड़कों को खोलने के लिए भारी मशीनरी लगा दी गई है।
लेकिन मरम्मत और बहाली का काम मौसम की स्थिति में सुधार होने और इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही पूरी क्षमता से शुरू किया जा सकेगा।
बिगड़ते हालात को देखते हुए डोडा जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन (Disaster Management) की टीमों को तुरंत सक्रिय कर दिया है।
ये टीमें प्रभावित इलाकों की लगातार निगरानी कर रही हैं और फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों की तलाश कर रही हैं।
जब तक सड़क संपर्क पूरी तरह से बहाल नहीं हो जाता, तब तक संवेदनशील और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में यात्रा न करें।
भूस्खलन वाले इलाकों से दूर रहें और सुरक्षित स्थानों पर ही आश्रय लें।
दहशत में न आएं, अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
किसी भी आपात स्थिति में तुरंत जारी किए गए हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।
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