4 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित ओजे 287 (OJ 287) में दो अतिविशाल ब्लैक होल एक-दूसरे की परिक्रमा कर रहे हैं, जिससे निकलने वाले शक्तिशाली जेट का 10 वर्षों तक अध्ययन किया गया है।
ब्रह्मांडीय रहस्य से उठा पर्दा: 10 साल की रिसर्च में विशाल ‘बाइनरी ब्लैक होल’ (ओजे 287) के व्यवहार का हुआ अहम खुलासा”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
अंतरिक्ष के अनसुलझे रहस्यों को लेकर एक बड़ी और ऐतिहासिक वैज्ञानिक सफलता हाथ लगी है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान, आर्यभट्ट अनुसंधान संस्थान (ARIES) नैनीताल के वैज्ञानिकों ने एक अंतरराष्ट्रीय टीम के साथ मिलकर दुर्लभ खगोलीय पिंड ‘ओजे 287’ (OJ 287) का एक दशक तक अध्ययन किया है।
इस 10 वर्षीय व्यापक निगरानी से ब्रह्मांड में स्थित इस विशाल द्विआधारी (बाइनरी) ब्लैक होल प्रणाली के शक्तिशाली उत्सर्जन और व्यवहार के बारे में कई चौंकाने वाली और नई जानकारियां सामने आई हैं।
ओजे 287 पृथ्वी से लगभग 4 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक विशिष्ट और दुर्लभ खगोलीय पिंड (ब्लेज़र) है।
इसके केंद्र में एक नहीं, बल्कि दो अतिविशाल ब्लैक होल (Supermassive Black Holes – SMBH) मौजूद हैं, जो 12 साल की कक्षीय अवधि (Orbital Period) में एक-दूसरे की परिक्रमा करते हैं।
इसे ही ‘बाइनरी ब्लैक होल सिस्टम’ कहा जाता है। इन ब्लैक होल का द्रव्यमान हमारे सूर्य से लाखों-अरबों गुना अधिक हो सकता है।
जब इन ब्लैक होल के आसपास का पदार्थ भारी ऊर्जा के साथ घूमता है, तो प्रकाश की गति से पृथ्वी की ओर आयनित पदार्थ और विकिरण की एक तेज जेट निकलती है।
इसी शक्तिशाली जेट को खगोल विज्ञान में ‘ब्लेज़र’ (Blazar) कहा जाता है। ओजे 287 समय के साथ अपनी चमक में एक विशिष्ट ‘दोहरे शिखर’ (Double-peaked) वाला पैटर्न बनाता है, जिसकी खोज 1988 में फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने की थी।
ARIES के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आलोक सी. गुप्ता के नेतृत्व में किए गए इस महा-अध्ययन में भारत सहित 18 देशों (अमेरिका, चीन, इटली, जर्मनी आदि) के 48 अनुसंधान संस्थानों के 106 वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।
टीम ने 2015 से 2025 तक दुनिया भर की दो दर्जन से अधिक दूरबीनों का उपयोग करके ओजे 287 का ऑप्टिकल अवलोकन (Optical Observation) किया। यह पिछले 150 वर्षों में ओजे 287 के लिए उपलब्ध सबसे व्यापक और सघन डेटासेट माना जा रहा है।
इस व्यापक शोध ने अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों को सुलझाने में मदद की है:
छोटे ब्लैक होल का उत्सर्जन: ईएम स्पेक्ट्रम (EM Spectrum) से प्राप्त आंकड़ों ने यह समझने में मदद की है कि अलग-अलग समय पर दोनों ब्लैक होल एक-दूसरे के सापेक्ष कहां स्थित होते हैं और पहली बार छोटे ब्लैक होल से होने वाले उत्सर्जन के प्रमाण मिले हैं।
विशाल द्रव्यमान: [O III] उत्सर्जन रेखा की चौड़ाई के आधार पर केंद्रीय (बड़े) ब्लैक होल का द्रव्यमान कम से कम 3.89 अरब सौर द्रव्यमान (सूर्य से 3.89 अरब गुना बड़ा) आंका गया है।
मल्टीमैसेंजर खगोल विज्ञान: इस अध्ययन ने मल्टीमैसेंजर खगोल विज्ञान (जहां प्रकाश, गुरुत्वाकर्षण तरंगों और कॉस्मिक किरणों का एक साथ अध्ययन होता है) के लिए नए दरवाजे खोल दिए हैं, जिससे विद्युत चुम्बकीय और गुरुत्वाकर्षण तरंग संकेतों के बीच संबंध को समझा जा सकेगा।
यह अध्ययन ओजे 287 को एक गतिशील और ‘चरम ब्रह्मांडीय प्रयोगशाला’ के रूप में स्थापित करता है, जो भविष्य में ब्लैक होल की भौतिकी (Physics) को समझने में अहम भूमिका निभाएगा।
| विषय / पहलू | महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी |
| खगोलीय पिंड (Object) | ओजे 287 (OJ 287) – एक अतिविशाल ब्लेज़र |
| पृथ्वी से दूरी | लगभग 4 अरब प्रकाश वर्ष |
| सिस्टम का प्रकार | बाइनरी ब्लैक होल (दो अतिविशाल ब्लैक होल एक-दूसरे की परिक्रमा करते हुए) |
| कक्षीय अवधि (चक्र) | 12 वर्ष का परिक्रमा चक्र |
| केंद्रीय ब्लैक होल का द्रव्यमान | 3.89 अरब सौर द्रव्यमान (सूर्य से 3.89 अरब गुना बड़ा) |
| अध्ययन की अवधि | 10 वर्ष (2015 से 2025 तक) |
| नेतृत्वकर्ता संस्थान | ARIES (आर्यभट्ट अनुसंधान संस्थान, नैनीताल, भारत) |
| वैज्ञानिक टीम | 18 देशों के 106 वैज्ञानिक और 48 अनुसंधान संस्थान |
| प्रमुख उपलब्धि | छोटे ब्लैक होल से उत्सर्जन का प्रमाण और सबसे व्यापक ऑप्टिकल डेटासेट |
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