जौनपुर: बक्शा BDO के खिलाफ कर्मचारियों ने पारित किया निंदा प्रस्ताव, विकास भवन में भारी विरोध | The Politics Again
जौनपुर: ग्राम सचिवों ने खोला बक्शा BDO के खिलाफ मोर्चा, विकास भवन की चौपाल में निंदा प्रस्ताव पारित
जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : वरुण यादव की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में प्रशासनिक अधिकारियों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के बीच तनातनी खुलकर सामने आ गई है।
शनिवार को विकास भवन परिसर में आयोजित ‘क्षेत्रीय कर्मचारी समस्या सुनवाई चौपाल दिवस’ में कर्मचारियों का आक्रोश फूट पड़ा।
ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति (जौनपुर) के बैनर तले आयोजित इस चौपाल में बक्शा विकास खंड के खंड विकास अधिकारी (BDO) शुभम बरनवाल के खिलाफ सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।
BDO पर लगा सचिव से दुर्व्यवहार का आरोप
इस चौपाल में जिले के विभिन्न विकास खंडों से भारी संख्या में ग्राम सचिवों और सहायक विकास अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान मनरेगा और बक्शा विकास खंड के BDO शुभम बरनवाल द्वारा एक ग्राम सचिव के साथ किए गए दुर्व्यवहार का मामला गूंजा।
घटना को लेकर सदन में मौजूद सभी कर्मचारियों ने गहरी नाराजगी जताई और एक सुर में BDO के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर कड़ा संदेश दिया।
गैर-विभागीय कार्यों के दबाव से कर्मचारी पस्त
कर्मचारियों ने शासन-प्रशासन द्वारा थोपे जा रहे अव्यावहारिक लक्ष्यों पर भी जमकर भड़ास निकाली।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि फार्मर रजिस्ट्री, पीएम सूर्यघर योजना, फैमिली आईडी, आयुष्मान कार्ड और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) जैसे गैर-विभागीय कार्यों का अत्यधिक दबाव उन पर डाला जा रहा है।
सबसे बड़ा आक्रोश निराश्रित गौशालाओं के प्रबंधन को लेकर देखने को मिला। कर्मचारियों का तर्क है कि कृषि, सिंचाई, राजस्व, गृह और पशुधन जैसे संबंधित विभागों की जिम्मेदारियां तय न करके, इन गौशालाओं का पूरा जिम्मा और जवाबदेही सिर्फ ग्राम सचिव के सिर पर मढ़ी जा रही है।
संघ ने इसे सीधे तौर पर कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का हनन करार दिया है।
लंबित एरियर और वेतन वृद्धि रोके जाने से मानसिक तनाव
चौपाल में विभागीय उत्पीड़न और आर्थिक शोषण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कर्मचारियों ने बताया कि अधिकांश सचिवों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) वर्षों से फाइलों में धूल फांक रही है।
इसके अलावा बिना किसी स्पष्ट कारण या नोटिस के कर्मचारियों का एसीपी (ACP), एरियर और वेतन वृद्धि रोकी जा रही है।
इन प्रशासनिक लापरवाहियों के चलते कर्मचारी गंभीर मानसिक तनाव और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।
उत्पीड़न अब बर्दाश्त नहीं: डॉ. प्रदीप सिंह
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद जौनपुर के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप सिंह और ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. फूलचंद कनौजिया ने संयुक्त रूप से की।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. प्रदीप सिंह ने शासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “क्षेत्रीय कर्मचारियों का किसी भी स्तर पर उत्पीड़न अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जमीनी स्तर के कर्मचारियों को उनका हक मिलना ही चाहिए।” उन्होंने ऐलान किया कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान और उनकी एकजुटता के लिए भविष्य में भी जनपद स्तर पर ऐसे ‘समस्या चौपाल दिवस’ लगातार आयोजित किए जाएंगे।
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