“बंगाल चुनाव से पहले आयोग का ‘हंटर’: अब हर हफ्ते दिल्ली जाएगी जिलों की रिपोर्ट!”
“पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने एक अभूतपूर्व रणनीति तैयार की है”
कोलकाता 04 / 01 / 2026 संतोष सेठ की रिपोर्ट
आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि वह चुनाव की तारीखों के एलान तक हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठेगा, बल्कि 5 जनवरी, 2026 से पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था की बागडोर अप्रत्यक्ष रूप से अपने हाथ में ले लेगा।
1. साप्ताहिक रिपोर्टिंग: हर शनिवार होगा ‘हिसाब’
चुनाव आयोग ने राज्य के सभी जिला मजिस्ट्रेटों (DM) को निर्देश दिया है कि वे हर हफ्ते कानून-व्यवस्था की विस्तृत रिपोर्ट मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) को भेजें।
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सीधी निगरानी: यह रिपोर्ट हर सोमवार को दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के मुख्यालय भेजी जाएगी।
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फोकस एरिया: इसमें राजनीतिक झड़पें, असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई, संवेदनशील मतदान केंद्रों की मैपिंग और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों का विवरण शामिल होगा।
2. SIR प्रक्रिया: 58 लाख नाम हटने से सियासी हड़कंप
राज्य में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची को ‘फिल्टर’ किया जा रहा है।
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बड़ी कार्रवाई: ड्राफ्ट रोल के अनुसार, राज्य भर से लगभग 58.16 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। ये वे लोग हैं जो या तो मृत हैं, जगह छोड़ चुके हैं या जिनके नाम दो जगह दर्ज थे।
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महत्वपूर्ण तारीख: 14 फरवरी, 2026 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।
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विवाद: राजनीतिक दल, विशेषकर सत्ताधारी TMC, ने इस प्रक्रिया में ‘भेदभाव’ के आरोप लगाए हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि यह 21 साल बाद किया जा रहा एक “शुद्धिकरण अभियान” है।
3. 25 नोडल एजेंसियों की ‘डिजिटल और ग्राउंड’ घेराबंदी
चुनाव में धनबल और बाहुबल को रोकने के लिए 25 अलग-अलग नोडल एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।
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ये एजेंसियां प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर (IT), सीमा शुल्क, और पुलिस के साथ मिलकर काम करेंगी।
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उद्देश्य: अवैध हथियारों की तस्करी, फर्जी खबरों के प्रसार और वोटरों को लुभाने के लिए बांटी जाने वाली ‘मुफ्त’ चीजों (Freebies) पर रोक लगाना।
आयोग का रोडमैप: एक नजर में
| गतिविधि | समय सीमा | प्रभाव |
| साप्ताहिक रिपोर्टिंग | 5 जनवरी से प्रारंभ | कानून-व्यवस्था पर सख्त नियंत्रण। |
| दावे और आपत्तियां | 15 जनवरी 2026 तक | मतदाताओं को नाम जुड़वाने का मौका। |
| फाइनल वोटर लिस्ट | 14 फरवरी 2026 | अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन। |
| आयोग की बेंच का दौरा | फरवरी अंतिम सप्ताह | चुनाव की तैयारियों का अंतिम निरीक्षण। |
| शेड्यूल की घोषणा | मार्च 2026 (संभावित) | चुनाव की तारीखों का एलान। |
क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार चुनाव आयोग “बिहार मॉडल” से भी अधिक सख्त रुख अपना रहा है। 2026 का चुनाव बंगाल में ऐतिहासिक होने वाला है क्योंकि इस बार चुनाव मशीनरी का सक्रिय होना चुनाव से 3-4 महीने पहले ही शुरू हो चुका है।











