चारधाम यात्रा 2026 के पहले चरण में हेलीकॉप्टर संचालन सुरक्षा नियमों के कड़ाई से पालन के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिससे 78 हजार से अधिक तीर्थयात्रियों की यात्रा सुगम हुई।
चारधाम यात्रा 2026: सुरक्षा नियमों के साथ हेलीकॉप्टर संचालन का पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न, 78 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भरी उड़ान”
नई दिल्ली/देहरादून: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तराखंड में चल रही पवित्र चारधाम यात्रा 2026 के पहले चरण के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं का सुरक्षित और सफल संचालन पूरा कर लिया गया है।
नागर विमानन मंत्रालय (Civil Aviation Ministry) ने इस पर गहरा संतोष व्यक्त किया है। खास बात यह रही कि सुरक्षा नियमों के कड़ाई से पालन के कारण यह पूरा संचालन बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हुआ।
जो यात्रियों के लिए सुरक्षित और विश्वसनीय हवाई संपर्क सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
हेलीकॉप्टर संचालन का यह पहला चरण अप्रैल 2026 में चारधाम यात्रा की शुरुआत के साथ शुरू हुआ था और 26 जून 2026 को सफलतापूर्वक समाप्त हुआ।
दैनिक उड़ानें: इस अवधि में प्रतिदिन लगभग 400 हेलीकॉप्टर उड़ानों का संचालन किया गया।
शटल उड़ानें: 12,032 शटल उड़ानों के माध्यम से 67,064 तीर्थयात्रियों की यात्रा को सुगम बनाया गया।
चार्टर उड़ानें: 2,065 चार्टर उड़ानों के जरिए 11,715 तीर्थयात्रियों को सेवाएं दी गईं।
कुल मिलाकर 78 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने सुरक्षित और विश्वसनीय हवाई सेवा का लाभ उठाया।
नागर विमानन मंत्री श्री राम मोहन नायडू ने इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक श्रद्धालु पवित्र यात्रा पूरी सुरक्षा और विश्वास के साथ संपन्न करे।
हमने यात्रा शुरू होने से काफी पहले डीजीसीए (DGCA), हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों और यूकाडा (UCADA) के साथ लगातार समीक्षा की थी।
इस व्यापक तैयारी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के सक्रिय सहयोग के लिए मैं उनका विशेष आभार व्यक्त करता हूं।”
चारधाम का पहाड़ी क्षेत्र अपने तेजी से बदलते मौसम, संकरी घाटियों और सीमित परिचालन समय के कारण विमानन क्षेत्र के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
इसे देखते हुए मंत्रालय ने ‘जीरो-टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए कई नए सुरक्षा मानक लागू किए:
समर्पित के-रूट्स (K-Routes): भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने घाटी में व्यवस्थित हेलीकॉप्टर मूवमेंट के लिए समर्पित के-रूट्स बनाए और सहस्रधारा व सेरसी में हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) सेवाएं शुरू कीं।
कमांड और नियंत्रण केंद्र: सहस्रधारा और सीतापुर में दो एकीकृत ‘कमांड, नियंत्रण, संचार एवं समन्वय केंद्र’ (ICCCC) स्थापित किए गए, जहां से सभी 33 PTZ कैमरों के जरिए हेलीकॉप्टरों की केंद्रीय निगरानी की गई।
मौसम की सटीक निगरानी: आईएमडी (IMD) के सहयोग से सीतापुर, केदारनाथ, बद्रीनाथ, झाला और खरसाली में 5 स्वचालित मौसम अवलोकन प्रणाली (AWOS) स्थापित की गईं।
पायलटों के लिए कड़े नियम: केवल उन पायलटों को उड़ान की अनुमति दी गई जिनके पास न्यूनतम 750 घंटे का पर्वतीय उड़ान अनुभव (पिछले एक साल में 100 घंटे) और केदारनाथ में कम से कम 10 टेकऑफ/लैंडिंग का अनुभव था।
वजन सीमा और ट्रैकिंग: सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हेलीकॉप्टरों में यात्रियों का भार अधिकतम अनुमत क्षमता के 70 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया और हर हेलीकॉप्टर में ट्रैकिंग डिवाइस लगाया गया।
विमानन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा उल्लंघनों के प्रति सरकार का रवैया सख्त रहेगा। चारधाम यात्रा 2026 के पहले चरण का यह सफल संचालन भारत सरकार की मजबूत परिचालन योजना और कड़े नियामकीय पर्यवेक्षण का शानदार प्रमाण है।
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