उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर के नए नियम और कीमतें
उज्ज्वला योजना: सरकार का बड़ा फैसला, सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों की लिमिट 9 से घटाकर 4 की; जानें नई दरें और वजह “
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
केंद्र सरकार ने ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY) के करोड़ों लाभार्थियों के लिए नियमों में एक अहम बदलाव किया है।
‘The Politics Again’ की बिजनेस और पॉलिसी डेस्क के अनुसार, सरकार ने सालाना मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की अधिकतम सीमा को 9 से घटाकर मात्र 4 कर दिया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि यह फैसला लाभार्थियों की औसत सालाना खपत के आधार पर लिया गया है।
📉 12 से 9 और अब 4 पर आई लिमिट
साल 2016 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना के नियमों में लगातार बदलाव हुए हैं:
शुरुआती नियम: पहले इस योजना के तहत लाभार्थियों को एक साल में 14.2 किलोग्राम वाले 12 सिलेंडर सब्सिडी पर मिलते थे।
पहला बदलाव: पिछले साल सरकार ने इस सीमा को 12 से घटाकर 9 सिलेंडर कर दिया था।
नया नियम: अब इस लिमिट को और घटाकर सालाना 4 सिलेंडर कर दिया गया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खनूजा ने स्पष्ट किया कि संशोधित सीमा उज्ज्वला लाभार्थियों की औसत गैस खपत के बिल्कुल करीब है।
💰 कितनी है कीमत और 300 रुपये की सब्सिडी का गणित?
सरकार ने लाभार्थियों को राहत देने के लिए सीधे उनके बैंक खातों में सब्सिडी भेजने की व्यवस्था की है:
सब्सिडी का सफर: मई 2022 में उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए प्रति सिलेंडर 200 रुपये की सब्सिडी शुरू की गई थी, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया।
वर्तमान कीमत: हाल ही में कीमतों में दो बार बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये तक पहुंच गई है।
हालांकि, 300 रुपये की सब्सिडी के बाद उज्ज्वला लाभार्थियों को यह सिलेंडर 642 रुपये में पड़ रहा है।
सरकार का खर्च: एक सिलेंडर की डिलीवरी पर सरकार को लगभग 1,600 रुपये का खर्च आता है। साल 2022 से अब तक सरकार 52,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी दे चुकी है।
🛢️ तेल कंपनियों पर पश्चिम एशिया संकट की मार: प्रति सिलेंडर 700 का नुकसान
प्रवीण मल खनूजा ने गैस और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह वैश्विक संकट को बताया है:
पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आया है।
इसके बावजूद भारत में घरेलू एलपीजी की कीमतें वैश्विक स्तर की तुलना में कम रखी गई हैं।
इस मूल्य नियंत्रण के कारण पेट्रोलियम कंपनियों को एलपीजी बिक्री पर प्रति सिलेंडर लगभग 700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कुल मिलाकर (पेट्रोल-डीजल सहित) कंपनियों को लागत से कम कीमत पर बिक्री के कारण 600-700 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो रहा है।
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