वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर में संत रविदास की 650वीं जयंती वर्ष पर 'समरसता संकल्प अभियान' का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता। यह अभियान फरवरी 2027 तक चलेगा।
मिशन 2027: काशी से BJP का मास्टरस्ट्रोक, ‘समरसता संकल्प अभियान’ से एक साथ साधे यूपी और पंजाब के OBC-दलित वोटर”
वाराणसी: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के आगामी 2027 विधानसभा चुनावों और पंजाब फतह की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना सबसे बड़ा सियासी दांव चल दिया है।
संत शिरोमणि रविदास की 650वीं प्रकाश जयंती वर्ष के अवसर पर वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर से भाजपा ने ‘समरसता संकल्प अभियान’ का शंखनाद किया है।
ऊपर से देखने में यह भले ही एक धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रम लग रहा हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह भाजपा की ‘ओबीसी-दलित (OBC-Dalit) आउटरीच’ की नई और आक्रामक चुनावी रणनीति का सबसे बड़ा संकेत है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और केंद्रीय राज्यमंत्री पंकज चौधरी की मौजूदगी में शुरू किया गया यह अभियान आने वाले महीनों में भाजपा का सबसे बड़ा जनसंपर्क अभियान बनने जा रहा है।
इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संत रविदास की जन्मस्थली पर आयोजित इस कार्यक्रम के मंच पर 2 बड़े संतों के अलावा 15 कद्दावर नेता मौजूद थे।
इनमें से 11 नेता सीधे तौर पर ओबीसी-दलित समाज से आते हैं, जो उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और दिल्ली (4 अलग-अलग राज्यों) का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके अलावा 4 बड़े दलित नेता केंद्रीय स्तर के थे।
मंच पर यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम, अनुसूचित मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा, उत्तराखंड के मंत्री खजानदास, दिल्ली के मंत्री रविंद्र इंद्राज, यूपी के मंत्री असीम अरुण, हंसराज विश्वकर्मा, संजीव गोंड और क्षेत्रीय अध्यक्ष अशोक चौरसिया जैसे दिग्गज ओबीसी-दलित चेहरे मौजूद थे। साथ ही रैदास समाज से जुड़े करीब 100 संत भी उपस्थित थे।
भाजपा ने इस अभियान की अवधि, कार्यक्रमों के ढांचे और भौगोलिक विस्तार को पूरी तरह से चुनावी कैलेंडर के अनुरूप सेट किया है।
करीब सात महीने तक चलने वाले इस ‘समरसता संकल्प अभियान’ का समापन फरवरी 2027 में होगा—ठीक उसी समय जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अपने चरम पर होंगे।
अभियान के तहत बूथ स्तर तक पहुंचने की खास योजना तैयार की गई है। इसमें:
कलश यात्रा
संत संपर्क अभियान
समरसता यात्रा
छात्रावास संपर्क अभियान शामिल हैं।
इस दौरान भाजपा नेता संत रविदास के समता, सामाजिक न्याय और जाति-विहीन समाज के संदेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरीब-कल्याण योजनाओं से जोड़कर पेश करेंगे।
राजनीतिक दृष्टि से यह समय भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। काशी से शुरू हुआ यह अभियान सिर्फ यूपी नहीं, बल्कि पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को भी साधने का प्रयास है।
पंजाब में रविदासिया समाज का व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव है। खासकर पंजाब के दोआबा क्षेत्र की कई विधानसभा सीटों पर यह समुदाय हार-जीत तय करता है।
काशी स्थित संत रविदास जन्मस्थली का सीधा भावनात्मक जुड़ाव पंजाब के लाखों अनुयायियों से है। ऐसे में काशी की धरती से भाजपा ने यूपी और पंजाब दोनों राज्यों के दलित-ओबीसी वोटरों को एक साझा सामाजिक-राजनीतिक संदेश देने की सफल कोशिश की है।
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