रूहेलखंड-ब्रज में भाजपा का कुर्मी-लोध कार्ड, श्रुति और धर्मपाल को टिकट
यूपी राज्यसभा चुनाव: रूहेलखंड और ब्रज में भाजपा का बड़ा सियासी दांव, श्रुति गंगवार और धर्मपाल सिंह के जरिए साधा कुर्मी-लोध वोट बैंक”
बरेली/लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा जारी की गई आठ उम्मीदवारों की सूची में रूहेलखंड और ब्रज क्षेत्र की राजनीति को लेकर एक गहरी और दूरदर्शी रणनीति दिखाई दे रही है।
पार्टी ने बरेली की धरा से ताल्लुक रखने वाले दो प्रमुख ओबीसी (OBC) चेहरों—पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की पुत्री श्रुति गंगवार और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह—को उच्च सदन का प्रत्याशी बनाकर इस क्षेत्र में एक अभेद्य सियासी दुर्ग तैयार करने का मास्टरस्ट्रोक चला है।
श्रुति गंगवार के जरिए कुर्मी वोटर्स और पुराने कैडर को संदेश
बरेली से आठ बार के सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री रहे संतोष गंगवार को रूहेलखंड में कुर्मी समाज का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता है।
2024 के लोकसभा चुनाव में उनका टिकट कटने के बाद पार्टी ने पहले उन्हें झारखंड का राज्यपाल बनाया और अब उनकी बेटी श्रुति गंगवार को राज्यसभा भेजकर पार्टी ने पुराने व निष्ठावान कार्यकर्ताओं को एक बेहद कड़ा और सकारात्मक संदेश दिया है।
श्रुति गंगवार लंबे समय से समाज सेवा और संगठन के कार्यों से जुड़ी रही हैं। उनके उच्च सदन में जाने से बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर में फैले कुर्मी वोट बैंक को पार्टी के साथ मजबूती से बांधे रखने में मदद मिलेगी।
धर्मपाल सिंह के जरिए लोध समुदाय पर मजबूत पकड़
रूहेलखंड के साथ-साथ ब्रज और पश्चिमांचल के समीकरणों को साधने के लिए भाजपा ने योगी सरकार में पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह को राज्यसभा का टिकट दिया है।
धर्मपाल सिंह बरेली जिले की आंवला विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं और वे लोध (Lodh) बिरादरी के बड़े नेता माने जाते हैं।
ब्रज क्षेत्र में लोध समुदाय के बीच उनकी गहरी पैठ को देखते हुए उन्हें यह उच्च कद दिया गया है, ताकि इस बेल्ट में भाजपा के पारंपरिक ओबीसी वोट बैंक में कोई सेंधमारी न हो सके।
एक दर्जन से अधिक विधानसभा सीटों पर सीधा असर
भाजपा नेतृत्व के इस फैसले से रूहेलखंड और ब्रज क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है और दोनों प्रत्याशियों के नामांकन की तैयारियां जोरों पर हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन दो ओबीसी चेहरों को आगे करने से आगामी चुनावों में बरेली, बदायूं, एटा और कासगंज जिलों की सियासत पर सीधा असर पड़ेगा।
विशेषकर नवाबगंज, आंवला, शेखूपुर, दातागंज, मारहरा और पटियाली जैसी एक दर्जन से अधिक विधानसभा सीटों के जातीय समीकरणों को भाजपा ने अभी से अपने पक्ष में पूरी तरह से सुरक्षित कर लिया है।
भाजपा का रूहेलखंड-ब्रज प्लान: राज्यसभा के जरिए ओबीसी समीकरण
| चुनावी रणनीति / पहलू | महत्वपूर्ण तथ्य और आंकड़े |
| लक्षित क्षेत्र (Target Area) | रूहेलखंड और ब्रज क्षेत्र (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) |
| प्रमुख वोट बैंक | कुर्मी और लोध (OBC समुदाय) |
| प्रत्याशी 1: श्रुति गंगवार | कुर्मी चेहरा; पूर्व केंद्रीय मंत्री व राज्यपाल संतोष गंगवार की पुत्री |
| प्रत्याशी 2: धर्मपाल सिंह | लोध चेहरा; योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री, आंवला से 5 बार विधायक |
| प्रभावित होने वाले प्रमुख जिले | बरेली, बदायूं, एटा, कासगंज और पीलीभीत |
| असर वाली विधानसभा सीटें | नवाबगंज, आंवला, शेखूपुर, दातागंज, मारहरा, पटियाली आदि (12+ सीटें) |
| राजनीतिक संदेश | निष्ठावान कार्यकर्ताओं का सम्मान और ‘पीडीए’ की काट |











