“महाराष्ट्र की राजनीति में अक्सर ‘असंभव’ शब्द का कोई वजूद नहीं रहता, और अंबरनाथ नगर परिषद के चुनाव परिणामों ने इसे एक बार फिर साबित कर दिया है”
अंबरनाथ/मुंबई: 07 / 01 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
राज्य में महायुति गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद, भाजपा ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गृहक्षेत्र के करीब अंबरनाथ में उन्हें बड़ा झटका देते हुए धुर विरोधी कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया है। इस चौंकाने वाले समीकरण ने न केवल शिवसेना (शिंदे गुट) को सत्ता से बाहर कर दिया, बल्कि राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
अंबरनाथ नगर परिषद के महापौर पद के चुनाव में भाजपा की तेजश्री करंजुले ने शानदार जीत हासिल की। इस जीत के पीछे वह गठबंधन था जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। सत्ता के इस जादुई आंकड़े को छूने के लिए भाजपा और कांग्रेस एक साथ आ गए।
गठबंधन का स्वरूप: भाजपा (16), कांग्रेस (12) और एनसीपी-अजित पवार गुट (4) के पार्षदों ने एकजुट होकर मतदान किया।
कुल समर्थन: इस त्रिकोणीय गठबंधन को कुल 32 पार्षदों का समर्थन मिला, जिससे शिंदे सेना हाशिए पर चली गई।
यह घटनाक्रम इसलिए भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय है क्योंकि भाजपा आलाकमान ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ का आह्वान करता है। हालांकि, अंबरनाथ की स्थानीय राजनीति में समीकरण पूरी तरह बदल गए। जानकारों का मानना है कि भाजपा ने यह कदम स्थानीय स्तर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बढ़ते वर्चस्व को रोकने के लिए उठाया है।
भाजपा के इस पैंतरे से शिंदे खेमे में भारी नाराजगी है। मुख्यमंत्री के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अंबरनाथ में भाजपा और कांग्रेस का जो अपवित्र गठबंधन हुआ है, उसका जवाब भाजपा के बड़े नेताओं को देना चाहिए। यह शिवसेना का फैसला नहीं है, इसलिए सफाई भी उन्हें ही देनी होगी।”
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